— सुरक्षा आदेश के बाद भी खौफ: राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर से प्रोटेक्शन ऑर्डर मिलने के बाद एसपी कार्यालय पहुंची थी नवविवाहिता लिछमा जाट।
— थाने के बाहर 15-20 गाड़ियां तैनात: पीहर पक्ष के 50 से 60 लोगों ने सदर और जेएनवीसी थाने के बाहर घेरा डाला; ऑनर किलिंग की गंभीर आशंका।
— बयान दर्ज, लेकिन आगे जाने का रास्ता बंद: पुलिस ने गुमशुदगी और विवाह के संबंध में बयान तो लिए, लेकिन जोड़े को सुरक्षित ठिकाने तक भेजने में बरत रही ढिलाई।
— प्रशासन की होगी जिम्मेदारी: पीड़ित जोड़े ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें या उनके पति मनोज बिश्नोई को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जवाबदेही बीकानेर पुलिस की होगी।
बीकानेर, 7 जुलाई (मंगलवार)। बीकानेर शहर के पॉश इलाके में स्थित सदर और जयनारायण व्यास कॉलोनी (JNVC) थाना परिसर के बाहर इस वक्त भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। अपनी मर्जी से प्रेम विवाह करने वाली एक युवती ने राजस्थान उच्च न्यायालय से सुरक्षा आदेश मिलने के बाद भी अपनी और अपने पति की जान को गंभीर खतरा बताया है। पीड़िता का आरोप है कि उसके माता-पिता और रिश्तेदारों सहित करीब 50 से 60 लोग 15-20 गाड़ियों में सवार होकर लाठी-डंडों और हथियारों के साथ थाने के बाहर घात लगाकर बैठे हैं, जबकि पुलिस उन्हें सुरक्षित सुरक्षित ठिकाने (Safe House) तक ले जाने में आनाकानी कर रही है।
हाईकोर्ट से मिला था प्रोटेक्शन, एसपी के निर्देश पर दर्ज हुए बयान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरसिंहसर निवासी लिछमा जाट (पुत्री मांगीलाल जाट) ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से बामनिया निवासी मनोज बिश्नोई (पुत्र मनफूल विश्नोई) के साथ प्रेम विवाह किया है। विवाह के बाद लड़की के परिजनों की ओर से जयनारायण व्यास कॉलोनी थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी।
परिजनों के गुस्से और सामाजिक दबाव को देखते हुए प्रेमी जोड़े ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की शरण ली थी। हाईकोर्ट से सुरक्षा (Protection Order) मिलने के बाद दोनों पुलिस अधीक्षक (SP) मृदुल कच्छावा के समक्ष पेश हुए थे। एसपी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सदर थाना पुलिस ने नवविवाहित जोड़े के बयान दर्ज किए। वहीं, जेएनवीसी थाना पुलिस ने भी सदर थाने पहुंचकर दर्ज गुमशुदगी के मामले में लड़की के मर्जी के बयान (धारा 164 के तहत) लिए।
थाने के बाहर भारी जमावड़ा, ऑनर किलिंग की धमकी
बयान दर्ज होने के बाद असली संकट तब शुरू हुआ जब लड़की के पीहर पक्ष के लोगों को उनके थाने में होने की भनक लग गई। पीड़िता लिछमा जाट ने बताया कि इस समय उसके पिता मांगीलाल, मामा नन्दराम कूकणा (अकासर), तालाराम सियाग, सुखराम, ननुराम, शिवलाल, काका और भाई कवीन्द्र, मनोज व मनीष सहित करीब 50 से 60 लोग 15-20 गाड़ियों में सवार होकर सदर थाने को चारों तरफ से घेरकर खड़े हैं।
पीड़ित जोड़े का आरोप है कि ये सभी लोग उन्हें रास्ते में ही रोककर जान से मारने और ऑनर किलिंग की सरेआम धमकियां दे रहे हैं। कोर्ट का आदेश होने के बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन उन्हें उनके सुरक्षित ठिकाने या घर तक एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा) देकर पहुंचाने में ढिलाई बरत रहा है, जिससे उनकी जान हलक में अटकी हुई है।
"कुछ भी हुआ तो जिम्मेदार होगा बीकानेर पुलिस प्रशासन"
पीड़िता लिछमा और उसके पति मनोज ने पुलिस के उच्चाधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि वे दोनों बालिग हैं और कानूनन साथ रह रहे हैं। अगर थाने से निकलते ही पीहर पक्ष के लोग उन पर हमला करते हैं या उनकी हत्या कर देते हैं, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी बीकानेर पुलिस प्रशासन की होगी।
जोड़े ने मांग की है कि पुलिस अपनी अभिरक्षा में उन्हें गंतव्य तक सुरक्षित छोड़कर आए और उपद्रव करने की नीयत से थाने के बाहर खड़े असामाजिक तत्वों और उनके रिश्तेदारों को तुरंत गिरफ्तार कर पाबंद किया जाए। फिलहाल दोनों थाने के भीतर ही सुरक्षा की आस में बैठे हैं।

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