— एक ही परिवार में दो मौतें, पसरा मातम: नापासर के कुचौर निवासी लीला देवी और उनके नवजात शिशु की मौत से परिजनों में भारी आक्रोश।
— जनाना विंग से ट्रॉमा ICU तक का सफर: 3 जुलाई को सिजेरियन ऑपरेशन के बाद से लगातार बिगड़ रही थी हालत; वेंटिलेटर पर इलाज के दौरान तोड़ा दम।
— अत्यधिक ब्लीडिंग और कार्डियक अरेस्ट: अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया बोले— डॉक्टरों ने वेंटिलेटर सपोर्ट और सीपीआर देकर बचाने का किया भरसक प्रयास।
— अस्पताल पहुंचे कांग्रेस नेता कूकणा: रामनिवास कूकणा ने मॉर्च्युरी के बाहर परिजनों से की मुलाकात; पीबीएम की लगातार चरमरा रही चिकित्सा व्यवस्था पर उठाए सवाल।
बीकानेर, 6 जुलाई (सोमवार)। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग (लेडी एल्गिन) की चिकित्सा व्यवस्था और संवेदनहीनता एक बार फिर कटघरे में है। यहाँ शनिवार देर रात इलाज के दौरान एक और प्रसूता ने दम तोड़ दिया। प्रसूता की मौत से पहले उसके नवजात बच्चे की भी मौत हो चुकी थी। एक ही परिवार में मां और बच्चे दोनों की मौत के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। आक्रोशित परिजन और ग्रामीण पीबीएम की मोर्चरी के बाहर जमा हो गए और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
3 जुलाई को हुआ था सिजेरियन, नवजात की मौत के बाद मां की भी थमी सांसें
पीबीएम प्रशासन और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, नापासर थाना क्षेत्र के कुचौर गांव निवासी लीला (पत्नी रेखाराम) को प्रसव पीड़ा होने पर पीबीएम के जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
3 जुलाई को जनाना अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) में डॉक्टरों ने लीला का सिजेरियन (ऑपरेशन से) प्रसव करवाया। ऑपरेशन के ठीक बाद नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया था, जिससे परिवार पहले से ही गहरे सदमे में था। बच्चे की मौत के बाद प्रसूता लीला की तबीयत भी लगातार बिगड़ती चली गई। शनिवार देर रात ट्रॉमा आईसीयू (ICU) में इलाज के दौरान लीला ने भी दम तोड़ दिया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया का तकनीकी बयान
प्रसूता की मौत और इलाज की स्थिति को लेकर पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि सिजेरियन प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage - PPH/ज्यादा ब्लीडिंग) होने लगा था, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक और चिंताजनक हो गई।
महिला को तुरंत जनाना वार्ड से मुख्य ट्रॉमा आईसीयू में शिफ्ट कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया गया था। डॉक्टरों की सीनियर टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही थी, लेकिन शनिवार देर रात इलाज के दौरान मरीज को अचानक कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया। डॉक्टरों ने सीपीआर (CPR) देकर उन्हें रिवाइव करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद महिला को बचाया नहीं जा सका।
मॉर्च्युरी के बाहर जुटे ग्रामीण, कांग्रेस नेता कूकणा ने की वार्ता
लीला की मौत की खबर मिलते ही कुचौर गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्रित हो गए। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए कांग्रेस नेता रामनिवास कूकणा भी तुरंत अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गहरा रोष जताया।
कूकणा ने बताया कि पीबीएम अस्पताल में पिछले कुछ समय से प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतें बेहद चिंताजनक हैं और यह सीधे तौर पर इलाज की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े करता है। परिजनों की मांग पर महिला के इलाज से जुड़ी मेडिकल फाइल को प्रशासन द्वारा जब्त/कब्जे में लेने के बाद ही पोस्टमॉर्टम की विधिक प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
लगातार हो रही मौतों से मरीजों में दहशत का माहौल
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर पीबीएम अस्पताल के मातृ एवं शिशु विंग में प्रसूताओं की मृत्यु दर के आंकड़े लगातार बढ़े हैं, जिससे बीकानेर और आस-पास के जिलों से आने वाले ग्रामीण मरीजों में अपनी सुरक्षा को लेकर भारी डर और चिंता का माहौल है। हालांकि, इस मामले में लापरवाही के आरोपों को लेकर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक लिखित स्पष्टीकरण या जांच कमेटी गठित करने का बयान सामने नहीं आया है।

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