— अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश: राजस्थान की टीम ने हरियाणा सीमा में घुसकर अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण नेटवर्क पर किया करारा प्रहार।
— 6 महीने की कड़ी मेहनत: दो बार चकमा देकर भाग चुके शातिर दलाल राजेश को तीसरी बार में बीकानेर टीम ने बुने जाल में दबोचा।
— ₹36,500 में सौदा: डिकॉय गर्भवती महिला को फर्जी जांच के नाम पर जाल में फंसाया; रंगे हाथों दलाल गिरफ्तार, ऑनलाइन पेमेंट भी नहीं बचा सका।
— बिना जांच फर्जी रिपोर्ट का खेल: बेटी होने का झूठा डर दिखाकर गर्भपात के लिए उकसाता था गिरोह; सैकड़ों अजन्मे बच्चों की जान जाने की आशंका।
बीकानेर, 16 जुलाई (गुरुवार)। कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ राजस्थान सरकार की कड़ी मुस्तैदी के बीच बीकानेर पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) टीम ने अंतरराज्यीय स्तर पर एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर तथा एनएचएम मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम के सख्त निर्देशों पर काम करते हुए बीकानेर जोन की टीम ने पड़ोसी राज्य हरियाणा के डबवाली में एक बेहद जटिल और सफल 'डिकॉय ऑपरेशन' को अंजाम दिया है। टीम ने पिछले 6 महीनों से लगातार चकमा दे रहे अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह के मुख्य दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।
बीकानेर-श्रीगंगानगर की संयुक्त रणनीति रही सफल, डॉ. देवेंद्र चौधरी ने संभाली कमान
एनएचएम मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने इस मेगा ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि इस गिरोह की संदिग्ध गतिविधियों पर पिछले आधा साल से विभाग की पैनी नजर थी। इससे पहले बीकानेर और श्रीगंगानगर की टीमों ने दो बार जाल बिछाकर इसे पकड़ने का प्रयास किया था, लेकिन आरोपी अपनी अत्यधिक चालाकी और काउंटर-रेकी के कारण दोनों बार बच निकलने में कामयाब रहा था।
तीसरी बार में संयुक्त निदेशक (बीकानेर जोन) डॉ. देवेंद्र चौधरी के नेतृत्व में एक अचूक और सुनियोजित चक्रव्यूह तैयार किया गया। इस विशेष टीम में बीकानेर सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध और जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक व प्रभारी महेंद्र सिंह चारण शामिल रहे। टीम ने एक डिकॉय (फर्जी) गर्भवती महिला को तैयार कर दलाल से संपर्क साधा। शातिर दलाल ने भ्रूण के लिंग (लड़का या लड़की) की जांच कराने की एवज में ₹36,500 की मांग की। सौदा तय होने के बाद दलाल महिला को हरियाणा के डबवाली स्थित एक निजी अस्पताल ले गया, जहां पहले से ही मुस्तैद बीकानेर की टीम ने दबिश देकर दलाल को रंगे हाथों दबोच लिया।
बिना जांच के ही दे देते थे 'बेटी' होने की फर्जी रिपोर्ट, कराया जाता था गर्भपात
प्रारंभिक पुलिसिया और विभागीय पूछताछ में इस गिरोह का एक बेहद घिनौना और रूह कंपा देने वाला सच सामने आया है। जांच में पता चला है कि यह गिरोह वास्तव में कोई उच्च स्तरीय या वास्तविक भ्रूण लिंग जांच नहीं करता था, बल्कि केवल फर्जी रिपोर्ट के नाम पर भोले-भाले लोगों को गुमराह कर मोटी रकम वसूलता था।
मुनाफे और लालच के चक्कर में यह गिरोह अधिकांश मामलों में आने वाली गर्भवती महिलाओं को गर्भ में 'बेटी' होने की झूठी जानकारी थमा देता था। इसके बाद गिरोह से जुड़े लोग परिजनों को गर्भपात (Abortion) कराने के लिए मानसिक रूप से प्रेरित और विवश करते थे ताकि अवैध गर्भपात के नाम पर उनसे दोबारा मोटी रकम वसूली जा सके। स्वास्थ्य विभाग को गंभीर आशंका है कि इस गिरोह के फर्जीवाड़े और अवैध कारोबार के चक्कर में अब तक न जाने कितने अजन्मे बच्चों की जान जा चुकी है। फिलहाल इस नेटवर्क से जुड़े डबवाली के संबंधित अस्पताल और पूरे रैकेट की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है।
मास्टरमाइंड राजेश दो बार दे चुका था चकमा, ऑनलाइन पेमेंट भी नहीं आई काम
पकड़ा गया मुख्य आरोपी राजेश इतना शातिर और पेशेवर अपराधी है कि वह पूर्व में भी पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत जेल जा चुका है। वह किसी भी नई गर्भवती महिला की जांच करने से पहले उसके परिवार का पूरा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (सत्यापन) करवाता था। वह कभी भी ग्राहकों से सीधे आमने-सामने नहीं मिलता था और सिर्फ फोन के जरिए ही डील करता था।
इस बार भी पुलिसिया जाल से बचने के लिए उसने नकद (Cash) राशि लेने से साफ इनकार कर दिया और पकड़े जाने के डर से ₹36,500 का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करवाया। आरोपी का सोचना था कि नकद राशि नहीं होने पर टीम उसे नहीं फंसा पाएगी, लेकिन बीकानेर टीम की एडवांस डिजिटल मैपिंग और पुख्ता रणनीति के आगे उसकी यह आखिरी चालाकी भी पूरी तरह फेल हो गई।
प्रभारी महेंद्र सिंह चारण की जांबाजी से पूरा हुआ मिशन
इस पूरे डिकॉय ऑपरेशन को जीरो-एरर के साथ सफल बनाने में बीकानेर जिला पीसीपीएनडीटी प्रभारी महेंद्र सिंह चारण की भूमिका सबसे सराहनीय और निर्णायक रही। चारण ने पिछले 6 महीनों तक लगातार दिन-रात एक करके इस गिरोह के पीछे अपना मुखबिर तंत्र (Secret Network) सक्रिय रखा था। उन्होंने अपनी पहचान छिपाकर गिरोह की पल-पल की मूवमेंट की गोपनीय सूचनाएं जुटाईं। डिकॉय ऑपरेशन की पूरी स्क्रिप्ट तैयार करने से लेकर बीकानेर, श्रीगंगानगर, सीकर और राज्य पीसीपीएनडीटी सेल की विभिन्न टीमों के बीच लाइव समन्वय स्थापित करने में उनकी भूमिका लाजवाब रही।
इस बड़ी कार्रवाई को अमलीजामा पहनाने में पीसीपीएनडीटी कोऑर्डिनेटर नंदलाल पुनिया, रणदीप सिंह और सीओ-आईईसी विनोद बिश्नोई सहित राज्य सेल के कई अन्य अधिकारियों व कार्मिकों ने भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। टीम अब फरार चल रहे दूसरे दलाल की तलाश में छापेमारी कर रही है।

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