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बीकानेर: पुलिस की लापरवाही से गंभीर आरोपी को मिली जमानत; कोर्ट ने पूर्व SHO के खिलाफ जांच के दिए आदेश

India-1stNews



​— लापरवाही पड़ी भारी: जेएनवीसी (JNVC) थाने के तत्कालीन थानाधिकारी (SHO) विक्रम तिवाड़ी की लापरवाही के कारण एक गंभीर मामले के आरोपी को जमानत मिल गई.

समय पर चार्जशीट नहीं हुई पेश: पुलिस तय किए गए 90 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट (आरोप-पत्र) दाखिल नहीं कर पाई, जिसके चलते कानून के तहत आरोपी को यह फायदा मिला.

बड़े अधिकारियों को दिए निर्देश: कोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लेते हुए डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) और गृह सचिव को आदेश दिया है कि तत्कालीन एसएचओ के खिलाफ विभागीय जांच की जाए और 2 महीने के भीतर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी जाए.

बीकानेर, 15 अगस्त। बीकानेर में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक गंभीर अपराध के मामले में पुलिस तय समय (90 दिन) के अंदर कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं कर पाई। पुलिस की इस देरी का फायदा उठाकर आरोपी को कानूनी नियम के तहत 'डिफॉल्ट बेल' (जमानत) मिल गई. इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उस समय जेएनवीसी थाने के एसएचओ रहे विक्रम तिवाड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

क्यों मिली आरोपी को जमानत?

​नियमों के मुताबिक, कानून कहता है कि गंभीर अपराधों में पुलिस को 90 दिन के अंदर जांच पूरी करके कोर्ट में चार्जशीट पेश करनी होती है. अगर पुलिस ऐसा नहीं कर पाती, तो आरोपी को अपने आप जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है — इसे कानूनी भाषा में "डिफॉल्ट बेल" कहते हैं. चूंकि विक्रम तिवाड़ी की टीम तय समय में चार्जशीट पेश नहीं कर पाई, इसलिए आरोपी को यह जमानत मिल गई.

तत्कालीन एसएचओ पर बैठेगी जांच

​कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि थानाधिकारी का यह रवैया बताता है कि उन्होंने अपनी ड्यूटी को गंभीरता से नहीं लिया और गंभीर अपराध के मामले को हल्के में लिया. इसके बाद कोर्ट ने राजस्थान पुलिस के सबसे बड़े अधिकारी यानी डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) को पत्र लिखकर कहा है कि विक्रम तिवाड़ी के खिलाफ नियम के मुताबिक जांच और कार्रवाई शुरू की जाए, और दो महीने के अंदर कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए. साथ ही यह पत्र राजस्थान सरकार के गृह सचिव को भी भेजा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके.

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