— राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला: सर्किट बेंच बीकानेर ने स्मार्ट पॉइंट ए.के. टॉवर की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जिला आयोग के आदेश में किया संशोधन।
— जुर्माना राशि निरस्त: अज्ञात उपभोक्ताओं की क्षति के नाम पर राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में 50 हजार रुपये जमा कराने और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आदेश को किया गया पूरी तरह खारिज।
— राहत बरकरार: परिवादी को चॉकलेट की कीमत (90 रुपये), मानसिक-शारीरिक क्षतिपूर्ति (5,000 रुपये) और परिवाद खर्च (5,000 रुपये) देने का निचली अदालत का आदेश रखा गया यथावत।
— क्या था मामला: 18 अगस्त 2021 को बीकानेर निवासी अनिल सोनी ने स्मार्ट पॉइंट से अमूल डार्क चॉकलेट खरीदी थी, जो खोलने पर सड़ी-गली और खाने योग्य नहीं मिली थी। दोनों पक्षों में आपसी समझौता होने के बाद आयोग ने यह निर्णय सुनाया।
बीकानेर, 19 अगस्त। सड़ी-गली अमूल डार्क चॉकलेट बेचने के एक मामले में राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सर्किट बेंच बीकानेर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्मार्ट पॉइंट ए.के. टॉवर की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के पुराने आदेश में बड़ा संशोधन किया है। हालांकि, परिवादी को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति और हर्जाने के आदेश को बरकरार रखा गया है।
क्या था पूरा मामला?
गंगाशहर निवासी अनिल सोनी ने 18 अगस्त 2021 को अपनी भांजी के लिए स्मार्ट पॉइंट ए.के. टॉवर से अमूल डार्क चॉकलेट का पैकेट खरीदा था। घर पहुंचने पर जब पैकेट खोला गया, तो चॉकलेट पूरी तरह सड़ी-गली, दाग-धब्बों वाली और खाने योग्य नहीं पाई गई।
इस पर परिवादी ने 19 अगस्त 2021 को संबंधित अमूल प्रबंधन को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजकर पैकिंग संबंधी जानकारी और फोटो भी साझा किए। हालांकि, वहां से कोई संतोषजनक राहत नहीं मिलने पर परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में औपचारिक परिवाद दायर किया था।
जिला आयोग का पुराना आदेश और नया संशोधन
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बीकानेर ने 5 जून 2023 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए परिवाद स्वीकार किया था। जिला आयोग ने विपक्षीगण को निम्नलिखित आदेश दिए थे:
- चॉकलेट की कीमत के 90 रुपये अदा करना।
- शारीरिक एवं मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 5,000 रुपये देना।
- परिवाद खर्च के रूप में 5,000 रुपये (कुल 10,090 रुपये) देना।
- इसके अतिरिक्त, दुकान संचालक द्वारा उपभोक्ता के नाम पक्का बिल जारी नहीं करने को लेकर उपभोक्ता संरक्षण नियमों के तहत 50,000 रुपये राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष, जयपुर में जमा कराने का आदेश दिया था।
राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील और नया निर्णय
इस आदेश के खिलाफ स्मार्ट पॉइंट ए.के. टॉवर की ओर से राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील पेश की गई। सुनवाई के दौरान अपीलार्थी पक्ष की ओर से बताया गया कि परिवादी और उनके बीच आपसी राजीनामा (समझौता) हो चुका है। आयोग ने रिकॉर्ड का अवलोकन कर पाया कि दोनों पक्षों के बीच वास्तव में समझौता हो चुका है।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के सदस्य (न्यायिक) अरुण कुमार अग्रवाल और सदस्य दिनेश कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में जिला आयोग के आदेश के उस दूसरे हिस्से को कायम रखना उचित नहीं है, जिसमें अज्ञात उपभोक्ताओं की क्षति के नाम पर 50,000 रुपये राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का निर्देश दिया गया था।
आयोग ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 50,000 रुपये जमा कराने और उस पर लगने वाले 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आदेश को निरस्त कर दिया। हालांकि, परिवादी अनिल सोनी को मिलने वाली चॉकलेट की कीमत (90 रुपये), शारीरिक व मानसिक क्षतिपूर्ति (5,000 रुपये) और परिवाद खर्च (5,000 रुपये) का आदेश यथावत रखा गया है। इस मामले में परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता अनिल सोनी ने की।

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