— टैंकर की चपेट में आया मजदूर: कोटगेट थाना क्षेत्र के रानी बाजार इंडस्ट्रियल एरिया स्थित गली नंबर 7 की एक ऊन मिल में काम करने के बाद खुले में पड़ी ऊन पर सो रहे मजदूर नंदू सिंह भाटी (40) के ऊपर से पानी का टैंकर गुजर गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
— परिजनों का धरना और हत्या का आरोप: घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने इसे सामान्य हादसा मानने से इंकार करते हुए सुनियोजित हत्या करार दिया है और पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
— प्रशासन और पुलिस पर लापरवाही के आरोप: परिजनों का आरोप है कि उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई और बिना परिजनों के मौके पर मौजूदगी के शव को मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया गया, जिससे पुलिस व फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बीकानेर: जिले के कोटगेट थाना क्षेत्र स्थित रानी बाजार इंडस्ट्रियल एरिया की एक ऊन मिल में एक दर्दनाक और हिला देने वाला हादसा सामने आया है। काम के बाद थकान के कारण ऊन के ढेर पर सो रहे एक मजदूर के ऊपर से पानी का टैंकर निकल जाने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है और परिजनों ने मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
कोटगेट थानाधिकारी विक्रम तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतका की पहचान नंदू सिंह भाटी (40) पुत्र जयराम सिंह भाटी (निवासी- रीको रोड नंबर 8, गंगाशहर, बीकानेर) के रूप में हुई है, जो रानी बाजार गली नंबर 7 स्थित सुराणा/सुसवाणी वूलन फैक्ट्री में मजदूरी करता था।
प्राप्त विवरण के अनुसार, रविवार रात काम के बाद थकान के चलते मजदूर मिल परिसर में खुले में पड़ी ऊन के ऊपर ही सोने चला गया। इसके बाद सोमवार सुबह करीब 8 बजे 10 हजार लीटर पानी से भरा एक टैंकर वहां से गुजरा। टैंकर चालक को यह अंदेशा नहीं था कि ऊन के ढेर पर कोई सोया हुआ है, और टैंकर का पहिया मजदूर के ऊपर से निकल गया। इस हादसे में सिर बुरी तरह कुचल जाने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
सूचना मिलने पर खिदमतगार खादिम सोसायटी के सेवादारों (शोएब अहमद और राजकुमार खड़गावत) की मदद से पुलिस ने शव को पीबीएम अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया।
परिजनों का फूटा गुस्सा, हत्या का आरोप लगाकर धरना शुरू
घटना के बाद मामला पूरी तरह तूल पकड़ चुका है। मृतक के परिजनों और कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गजेंद्र सिंह सांखला ने आरोप लगाया है कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
परिजनों का कहना है कि उन्हें घटना की सूचना काफी देर से दी गई और पुलिस ने भी बिना परिजनों को विश्वास में लिए या सूचित किए शव को मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया, जो पुलिस और फैक्ट्री प्रबंधन की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है। मृतक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं।
इन मांगों को लेकर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गजेंद्र सिंह सांखला सहित बड़ी संख्या में लोग पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को उचित न्याय व सहायता मिले। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से गहनता से जांच कर रही है।



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