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बीकानेर में 'डिजिटल अरेस्ट' का खौफ: सास-बहू को 3 दिन वीडियो कॉल पर रखा 'कैद', 48 लाख ठगे; ED अफसर बनकर दिखाया सुप्रीम कोर्ट का फर्जी वारंट

India-1stNews



– करणी नगर की घटना: वॉट्सऐप वीडियो कॉल पर दिया 'मनी लॉन्ड्रिंग' का डर; कहा- 'करोड़ों का संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुआ है, अभी अरेस्ट करेंगे'

– 3 दिन चला टॉर्चर: घर में ही नजरबंद रहीं महिलाएं, डर के मारे ट्रांसफर कर दी पूरी जमा पूंजी; साइबर थाना इंचार्ज रमेश सर्वटा बोले- जांच जारी

– राहत की खबर: पुलिस की तत्परता से 22 लाख रुपए हुए होल्ड, बाकी रिकवरी के प्रयास तेज

बीकानेर, 26 जनवरी (सोमवार)। बीकानेर के पॉश इलाके करणी नगर में साइबर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और आमजन दोनों की नींद उड़ा दी है। यहां साइबर ठगों ने एक परिवार की दो महिलाओं (सास और बहू) को 3 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा।

​ठगों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI का अधिकारी बताकर महिलाओं को इतना डराया कि उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई के 48 लाख रुपए ठगों के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।

सुप्रीम कोर्ट का फर्जी वारंट और 3 दिन का खौफ

​पीड़ित परिवार ने साइबर थाने में जो आपबीती बताई, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं है। ठगों ने वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। सामने वर्दी पहने एक शख्स बैठा था जिसने खुद को ED का बड़ा अधिकारी बताया।महिलाओं को कहा गया कि "आपके बैंक खातों/आधार का उपयोग कर विदेश में करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) की गई है। आपके खिलाफ केस दर्ज हो चुका है।" डराने के लिए ठगों ने स्क्रीन पर सुप्रीम कोर्ट का एक फर्जी 'अरेस्ट वारंट' दिखाया और कहा कि अगर अभी सहयोग नहीं किया, तो 1 घंटे में पुलिस घर आकर गिरफ्तार कर लेगी। इसके बाद शुरू हुआ 3 दिन का 'डिजिटल अरेस्ट'। सास-बहू को आदेश दिया गया कि वे वीडियो कॉल नहीं काट सकतीं और न ही किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क कर सकती हैं। वे 24 घंटे कैमरे की निगरानी में रहीं।

'वेरिफिकेशन' के नाम पर लूट लिए 48 लाख

​डर के साये में जी रही महिलाओं को कहा गया कि अपने सारे पैसे "सरकारी खाते" (जो कि ठगों के खाते थे) में ट्रांसफर करें। जांच के बाद अगर पैसा सही पाया गया तो वापस कर दिया जाएगा। इसी झांसे में आकर परिवार ने 48 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। तीन दिन बाद जब कॉल अचानक कट गया और नंबर बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।

पुलिस का एक्शन: डेटा लीक की जांच

​घटना की जानकारी मिलते ही साइबर पुलिस एक्टिव हो गई। साइबर थाना इंचार्ज रमेश सर्वटा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगों के पास पीड़ित परिवार की बैंक डिटेल, आधार और निजी जानकारी कैसे पहुंची। एसपी कावेंद्र सिंह सागर के अनुसार, त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों को फ्रीज कर 22 लाख रुपए होल्ड करवा दिए गए हैं।

पुलिस की अपील: यह गलती न करें

​बीकानेर पुलिस ने आमजन से अपील की है:

  • ​कोई भी जांच एजेंसी (Police, CBI, ED) वॉट्सऐप या वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती।
  • ​'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कानून में कोई शब्द नहीं है।
  • ​अगर कोई गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगे, तो तुरंत कॉल काटें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

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