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बीकानेर पुलिस का 'खेल': कोर्ट में सामने खड़ा था आरोपी, पुलिस बोली- 'गिरफ्तारी वारंट नहीं है' और जाने दिया; अब बेटी लेकर फरार

India-1stNews



– परिवार न्यायालय का फैसला: नाबालिग की कस्टडी मां लीला और नानी पुष्पा को सौंपने के आदेश; सुरजाराम लेकर भागा था बच्ची

– पुलिस को चकमा: जोधपुर में दबिश देने गई टीम के हाथ रहे खाली, आरोपी फरार; एसपी कावेंद्र सागर से लगाई गुहार

-  गंगाशहर पुलिस की गजब लापरवाही: नानी ने SP को लिखी चिट्ठी, खोली पोल; 20 जनवरी तक स्कूल जा रही थी 10 साल की रितु, पुलिस 6 दिन सोती रही

बीकानेर, 24 जनवरी (शनिवार)। बीकानेर में पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली का एक और उदाहरण सामने आया है। परिवार न्यायालय ने एक नाबालिग बालिका के हित को सर्वोपरि मानते हुए उसकी कस्टडी मां और नानी को सौंपने का आदेश दिया था। कोर्ट ने गंगाशहर थानाधिकारी को 15 दिन में बच्ची को बरामद करने का सख्त निर्देश दिया था, लेकिन 11 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ खाली हैं।

​हताश होकर पीड़िता मां और नानी ने शुक्रवार को जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कावेंद्र सिंह सागर से मुलाकात कर अपनी बेटी को वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला?

​मां लीला और नानी पुष्पा देवी की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट अनिल सोनी ने बताया की याचिका के अनुसार, 29 नवंबर 2024 को आरोपी सुरजाराम कथित रूप से जबरन उनके घर में घुसा और नाबालिग बालिका को अपने साथ ले गया था। परिवार न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी अशोक चौधरी ने मामले की सुनवाई की। आरोपी सुरजाराम कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिस पर उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही की गई। कोर्ट ने माना कि नाबालिग का कल्याण मां और नानी के साथ रहने में ही है। कोर्ट ने गंगाशहर पुलिस को आदेश दिया कि आरोपी से बालिका को बरामद कर 15 दिनों के भीतर मां-नानी को सौंपा जाए।


​इस पूरे वाकये का खुलासा पीड़िता की नानी पुष्पा देवी और मां लीला ने एसपी कावेंद्र सिंह सागर को लिखे एक शिकायती पत्र में किया है।

कोर्ट रूम ड्रामा: जज बोले- 'रिकवर करो', पुलिस ने छोड़ दिया

​मामला परिवार न्यायालय संख्या-3 का है। पीठासीन अधिकारी अशोक चौधरी ने 13 जनवरी को आदेश दिया था कि नाबालिग रितु उर्फ रिधी (10) की कस्टडी मां-नानी को सौंपी जाए और गंगाशहर पुलिस 15 दिन में उसे बरामद करे।

​नानी पुष्पा देवी ने एसपी को बताया की आरोपी सुरजाराम उर्फ सुरेश सोनी (निवासी राजवा, जोधपुर) 20 जनवरी को खुद कोर्ट में पेश हुआ। सूचना पर गंगाशहर पुलिस भी वहां पहुंची। पुलिस ने जज से मार्गदर्शन मांगा। कोर्ट ने कहा- "आदेश साफ़ है, अविलंब आरोपी से बच्ची बरामद करें।" आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने यह कहकर उसे नहीं पकड़ा कि उनके पास गिरफ्तारी वारंट नहीं है। उन्होंने आरोपी को केवल नोटिस तामील करवाया और जाने दिया। आरोपी कोर्ट से निकला, सीधा जोधपुर (राजवा) गया और बच्ची को लेकर अंडरग्राउंड हो गया।

स्कूल रिकॉर्ड ने खोली पोल: 6 दिन क्या करती रही पुलिस?

​पत्र में पुलिस की सुस्ती का एक और बड़ा सबूत दिया गया है।

  • ​एसपी ने सीडीआर और लोकेशन के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। तब राजवा (जोधपुर) के सरकारी स्कूल के रिकॉर्ड के मुताबिक, बच्ची जनवरी महीने से लेकर 20 जनवरी की दोपहर 3 बजे तक रोज स्कूल आ रही थी। 14 से 20 जनवरी के बीच (6 दिन) पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। अगर पुलिस समय रहते स्कूल पहुंच जाती, तो बच्ची मिल सकती थी। आरोपी ने 20 तारीख को स्कूल में बीमारी का बहाना बनाया और बच्ची को ले गया।

अब केवल 4 दिन शेष

​कोर्ट द्वारा दी गई 15 दिन की मियाद में से 11 दिन बीत चुके हैं। अपनी गलती सुधारने के लिए गंगाशहर पुलिस बाद में नानी को लेकर जोधपुर गई, लेकिन तब तक "चिड़िया चुग गई खेत"। आरोपी फरार हो चुका था। मां-नानी ने एसपी से मिलकर गुहार लगाई है कि बच्ची की जान को खतरा है। अब इस मामले की जिम्मेदारी किसी निचले अधिकारी के बजाय स्वयं गंगाशहर थानाधिकारी (SHO) को सौंपी जाए।

जोधपुर में दी दबिश, लेकिन भाग निकला आरोपी

​कोर्ट के आदेश के बाद गंगाशहर पुलिस हरकत में आई, लेकिन परिणाम विफर रहा। पुलिस ने आरोपी सुरजाराम की लोकेशन ट्रेस कर उसके जोधपुर स्थित ठिकानों पर दबिश दी।आरोपी पुलिस को चकमा देकर बच्ची सहित वहां से फरार हो गया। पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही।

अब केवल 4 दिन शेष

​न्यायालय द्वारा दी गई 15 दिन की मियाद में से 11 दिन बीत चुके हैं। अब पुलिस के पास कोर्ट के आदेश की पालना के लिए महज 4 दिन बचे हैं। एसपी से मुलाकात के दौरान मां और नानी ने पुलिस की कार्यशैली पर निराशा जताई और जल्द से जल्द बच्ची को बरामद करने की मांग की। अब देखना यह है कि पुलिस आखिर कब तक बालिका को ढूंढ निकालती है।


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