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बीकानेर पुलिस की जांच कठघरे में: ₹50 लाख की मांग का वीडियो फिर भी आरोपी को माना 'निर्दोष'; कोर्ट ने जांच को बताया संदेहास्पद, FIR दोबारा खोलने के आदेश

India-1stNews



– न्याय पर संकट: सदर थाने के हेड कांस्टेबल गोपाल जांगिड़ की जांच पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी; बिना परिवादी के बयान लिए ही पेश कर दी क्लोजर रिपोर्ट

– इनसाइड स्टोरी: "50 लाख दो और बहन से पीछा छुड़ाओ", साले की इस धमकी का वीडियो सबूत भी नहीं आया पुलिस के काम; अब 26 मई तक देनी होगी नई रिपोर्ट

बीकानेर, 28 फरवरी (शनिवार)। "पुलिस अगर निष्पक्ष हो तो न्याय कभी दम नहीं तोड़ता, लेकिन जब रक्षक ही तथ्यों को मोड़ दे तो आम आदमी कहाँ जाए?" यह सवाल नोखा निवासी हड़मानाराम लखारा के मामले में सटीक बैठता है। सदर थाना पुलिस के एक जांच अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने पुख्ता वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद आरोपी को बचाने के लिए फाइल बंद कर दी। अब न्यायालय ने इस मामले में दखल देते हुए सदर थानाधिकारी को नया जांच अधिकारी नियुक्त कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​हड़मानाराम लखारा का अपनी पत्नी के साथ विवाद चल रहा है, लेकिन वह तलाक के बजाय घर बसाना चाहता है। आरोप है कि फरवरी माह में जब हड़मानाराम कोर्ट में पेशी पर था, तब उसके साले नरसीराम ने उसे बाहर बुलाया। नरसीराम ने अपने जीजा हड़मानाराम से ₹50 लाख की मांग की। उसने कहा कि "पैसे दो तो बहन से पीछा छुड़वा दूँगा और तेरी शादी किसी बिहारी लड़की से करवा दूँगा।"

  • वीडियो सबूत: हड़मानाराम के मित्र दिनेश लखारा ने इस पूरी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली, जिसमें नरसीराम स्कूटी पर बैठकर स्पष्ट रूप से पैसे मांगता और सौदेबाजी करता दिख रहा है।

पुलिस जांच पर क्यों उठे सवाल?

​परिवादी के अधिवक्ता अनिल सोनी ने बताया कि सदर थाने के हेड कांस्टेबल गोपाल जांगिड़ को जांच सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में यह तो स्वीकार किया कि वीडियो में ₹50 लाख की मांग की पुष्टि हो रही है, लेकिन इसके बावजूद चौंकाने वाला कदम उठाया:

  1. एकतरफा बयान: जांच अधिकारी ने परिवादी हड़मानाराम के बयान तक दर्ज नहीं किए।
  2. आरोपी की तरफदारी: केवल आरोपी और उसके दो गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को निर्दोष मानकर अंतिम रिपोर्ट (FR) पेश कर दी।
  3. कोर्ट का रुख: जब इस जांच को अदालत में चुनौती दी गई, तो न्यायाधीश ने वीडियो साक्ष्य देखकर पुलिस जांच को 'संदेहास्पद' माना और पुलिस की थ्योरी को खारिज कर दिया।

अब आगे क्या?

​न्यायालय ने सदर थानाधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। पुलिस को अब 26 मई तक अपनी नई रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। इस मामले ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी साक्ष्यों को नजरअंदाज कर जांच को प्रभावित करते हैं?





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