– खूनी पतंगबाजी: आजाद नगर निवासी प्रभुसिंह मेड़तिया के गले पर आया गहरा घाव; संतुलन बिगड़ने से स्कूटी सहित सड़क पर गिरे।
– हेलमेट बना कवच: गर्दन कटी पर हेलमेट की वजह से टली बड़ी अनहोनी; अस्पताल में पट्टी कराकर दी गई छुट्टी।
– प्रशासन को चुनौती: आखातीज से एक महीने पहले ही आसमान में मंडराने लगा 'मौत का धागा'; रोक के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा प्रतिबंधित मांझा।
बीकानेर, 15 मार्च (रविवार)।बीकानेर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को चौखूंटी पुलिया के पास एक व्यक्ति इस जानलेवा धागे की चपेट में आकर लहूलुहान हो गया। घटना के बाद आसपास मौजूद राहगीरों में भारी आक्रोश देखा गया।
गले में फंसा मांझा, सड़क पर गिरे प्रभुसिंह
जानकारी के अनुसार, आजाद नगर निवासी प्रभुसिंह मेड़तिया शनिवार को अपनी स्कूटी से चौखूंटी पुलिया से गुजर रहे थे। इसी दौरान अचानक हवा में लहराता हुआ चाइनीज मांझा उनके गले में आकर उलझ गया। जब तक वे स्कूटी रोकते, पैने मांझे ने उनके गले पर गहरा कट लगा दिया। गले से खून निकलता देख उनका संतुलन बिगड़ा और वे स्कूटी सहित सड़क पर गिर पड़े, जिससे उनके पैरों में भी चोट आई।
"हेलमेट नहीं होता तो मर जाता"
घायल प्रभुसिंह को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनके घाव पर पट्टी की। प्रभुसिंह ने बताया कि उन्होंने हेलमेट पहन रखा था, जिसके बेल्ट और निचले हिस्से की वजह से मांझा पूरी तरह गर्दन के अंदर नहीं जा सका। अगर हेलमेट नहीं होता, तो गला बुरी तरह कट सकता था और जान बचाना मुश्किल होता।
आखातीज से पहले ही 'खूनी' हुआ आसमान
बीकानेर का स्थापना दिवस (आखातीज) 19 अप्रैल को है, जिसमें अभी एक महीने से ज्यादा का समय है। लेकिन जनवरी में ऊंट उत्सव के बाद से ही शहर में पतंगबाजी का दौर शुरू हो चुका है।
बेखौफ बिक रहा मांझा: न तो बेचने वालों को कानून का डर है और न ही खरीदने वालों को किसी की जान की परवाह।
प्रशासनिक ढिलाई: प्रशासन की अपीलें केवल कागजों तक सीमित हैं। अगर धरातल पर दुकानों की सघन जांच नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह मांझा कई और परिवारों के चिराग बुझा सकता है।

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