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कब तक चढ़ती रहेगी मासूमों की बलि? बीकानेर में 'सिस्टम' की नाक के नीचे बिका खूनी मांझा, देशनोक में बच्चे की दर्दनाक मौत

India-1stNews



– सिस्टम फेल: प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा मौत का धागा; केवल कागजों तक सीमित रहा प्रशासन का 'एक्शन'।

– जनता भी कसूरवार: जानलेवा मांझे का इस्तेमाल बंद नहीं कर रहे लोग; मजे के लिए उड़ाई जा रही पतंग, किसी के घर का बुझा रही चिराग।

– मासूम का क्या दोष?: माता-पिता के साथ बाइक पर जा रहे बच्चे का गला रेता; अस्पताल पहुँचने से पहले ही तोड़ा दम।

– पुलिस की कार्रवाई: देशनोक पुलिस ने मामले की जांच शुरू की; मांझा बेचने वाले अवैध विक्रेताओं पर कस सकता है शिकंजा।

बीकानेर, 17 अप्रैल (शुक्रवार)। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने आज एक बार फिर बीकानेर की गोद सूनी कर दी। देशनोक कस्बे में शुक्रवार को हुए एक दर्दनाक हादसे में 10 साल के मासूम विराट की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई। जब तक परिजन उसे संभाल पाते, तब तक वह लहूलुहान होकर अचेत हो गया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

बाइक पर जा रहा था परिवार

​जानकारी के अनुसार, मासूम अपने माता-पिता के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहा था। रास्ते में अचानक आसमान से लटकता हुआ एक चाइनीज मांझा बाइक के सामने आया और सीधे बच्चे के गले में जा फंसा। मोटरसाइकिल की रफ्तार के कारण मांझे ने बच्चे की गर्दन को गहराई तक काट दिया।

मदद के लिए चिल्लाते रहे माता-पिता

​हादसे के बाद सड़क पर चीख-पुकार मच गई। बच्चे को तड़पता देख माता-पिता बदहवास हो गए और उसे लेकर तुरंत अस्पताल की ओर दौड़े, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने के कारण मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है।

प्रशासनिक लापरवाही: छापेमारी के नाम पर महज खानापूर्ति?

​जिला प्रशासन और पुलिस ने हर साल की तरह इस बार भी चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। देशनोक सहित पूरे जिले की गलियों में यह खूनी धागा आसानी से उपलब्ध है। सवाल यह है कि जब प्रतिबंध है, तो यह मांझा दुकानों तक पहुँच कैसे रहा है? क्या प्रशासन केवल किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है? आज एक घर का चिराग बुझ गया, लेकिन क्या अब भी उन दुकानों पर ताले लगेंगे जो 'मौत' बेच रहे हैं?

जनता की लापरवाही: मनोरंजन या मौत का खेल?

​इस मौत में जितनी कसूरवार व्यवस्था है, उतनी ही जिम्मेदार वह जनता भी है जो जानते हुए भी चाइनीज मांझे का उपयोग कर रही है। पतंगबाजी के शौकीनों के लिए यह केवल एक मजबूत धागा हो सकता है, लेकिन सड़कों पर चल रहे लोगों के लिए यह 'फांसी का फंदा' है। चंद रुपयों के लालच में बेचने वाले दुकानदार और थोड़े से मनोरंजन के लिए इसे खरीदने वाले अभिभावक और युवा, आज इस बच्चे की मौत के बराबर के भागीदार हैं।


India First News की अपील: आज किसी और का बच्चा गया है, कल आपका भी हो सकता है। चाइनीज मांझे का बहिष्कार करें!

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