– सिस्टम फेल: देशनोक में मासूम विराट की मौत के बाद भी नहीं चेते लोग; शहर भर में धड़ल्ले से हुआ प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का इस्तेमाल।
– लहूलुहान हुई सड़कें: बाइक सवारों के लिए 'फांसी का फंदा' बना मांझा; किसी की गर्दन रेती तो किसी का चेहरा और नाक बुरी तरह कटे।
– बेजुबानों पर सितम: आसमान में उलझकर दर्जनों पक्षी हुए जख्मी; बिजली के तारों और छतों पर फंसी दिखीं पक्षियों की लाशें।
बीकानेर, 20 अप्रैल (सोमवार)। बीकानेर स्थापना दिवस और अक्षय तृतीया पर जहाँ एक ओर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सराबोर था, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर चल रहे राहगीरों के लिए यही आसमान 'खौफ' का सबब बन गया। प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने शहर के उत्सव को खून से सराबोर कर दिया। शहर के दो बड़े अस्पतालों में देर रात तक 150 से अधिक घायल मदद की गुहार लगाते पहुँचे।
पीबीएम ट्रोमा सेंटर: 135 घायलों का उपचार
पीबीएम अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में रविवार सुबह से ही घायलों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया था। ट्रोमा सेंटर के सीएमओ डॉ. एल कपिल ने बताया कि रात तक करीब 135 घायल उपचार के लिए आए। इनमें अधिकांश बाइक सवार थे जिनके गले और चेहरे मांझे की चपेट में आ गए।
- गणेश गहलोत (45): जीवननाथ जी की बगेची निवासी गणेश की गर्दन पर इतना गहरा घाव था कि उन्हें तुरंत भर्ती करना पड़ा।
- रियाज (28): रियाज के गले पर भी जानलेवा कट लगा, जिसका गहन उपचार किया गया।
- जिला अस्पताल: यहाँ भी करीब 15 लोग मांझे से जख्मी होकर उपचार के लिए पहुँचे।
मासूम विराट की मौत से भी नहीं मिला सबक
हाल ही में देशनोक में मासूम विराट की मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। पुलिस ने कई जगह छापेमारी कर मांझा जब्त भी किया, लेकिन रविवार को शहर की छतों पर जिस तरह से चाइनीज मांझे की चरखियां दिखीं, उसने प्रशासन की सख्ती और आम जनता की संवेदनहीनता की पोल खोलकर रख दी।
पक्षियों के लिए 'खूनी रविवार'
इंसानों के साथ-साथ आसमान के राजा कहे जाने वाले पक्षी भी इस खूनी खेल का शिकार हुए। चाइनीज मांझे में उलझकर दर्जनों कबूतर, कौवे और चील घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। स्थानीय पक्षी प्रेमियों ने कई पक्षियों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुँचाया, लेकिन कई बेजुबानों ने तारों पर लटके-लटके ही दम तोड़ दिया।
आज बढ़ सकता है आंकड़ा
बीकानेर में पतंगबाजी का दौर आज यानी सोमवार को भी जारी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि घायलों की संख्या और बढ़ सकती है। प्रशासन ने एक बार फिर अपील की है कि चाइनीज मांझे का उपयोग न करें, लेकिन धरातल पर इन अपीलों का असर कम ही नजर आ रहा है।

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