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सब खैरियत है: मरुधरा और बीकाणा की राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों की 4 बड़ी इनसाइडर खबरें!

India-1stNews



1. राज्यसभा की दावेदारी: बड़े-बड़े दिग्गज पिछड़े, बीकानेर के 'संघनिष्ठ गैर-सियासी चेहरे' की चर्चा तेज

​राज्यसभा चुनावों को लेकर मरुधरा की भाजपा लॉबी का सियासी पारा इस वक्त जेठ की गर्मी से भी ज्यादा बढ़ा हुआ है। राजस्थान से राज्यसभा की दो कन्फर्म सीटों के लिए दावेदारी जताने पार्टी के करीब एक दर्जन नेता लगातार दिल्ली की उड़ानें भर रहे हैं।

​सूत्रों की मानें तो इस बार दावेदारों की सुपर लिस्ट में पूरी तरह 'संघनिष्ठ' चेहरों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बीकाणा (बीकानेर) अंचल के एक ऐसे संघनिष्ठ ‘गैर-सियासी शख्सियत’ का नाम मीडिया की गलियों में खूब वायरल हो रहा है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। वहीं, दूसरी ओर अपनी पूरी ताकत के साथ दिल्ली दरबार में दौड़ लगा रहे डॉ. सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ सरीखे कई भाजपाई दिग्गज फिलहाल इस रेस में पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

अंदर की बात: असल में, पार्टी आलाकमान इस बार ‘संघ की गाइडलाइन’ के मुताबिक जातीय समीकरणों को साधते हुए बिल्कुल नए चेहरों को मौका देने के मूड में है। ऐसे में तय माना जा रहा है कि राज्यसभा की उम्मीदवारी के लिए भाजपा के दोनों नाम सबको चौंका देंगे। मगर फिलहाल... सब खैरियत है।


2. एसीबी की रडार में पीबीएम के भ्रष्टाचारी; टेंडरों के घोटालों के साथ 'कमाई के ब्यौरे' से मचा तहलका

​अपने भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण लगातार बदनाम हो रहे बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में इन दिनों भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के एक लेटर ने तहलका मचा रखा है। खबर है कि इस पत्र के जरिए एसीबी ने पीबीएम के घोटालों से जुड़े कई संदिग्ध टेंडरों की मूल फाइलें तलब की हैं।

​दरअसल, एसीबी मुख्यालय को पुख्ता साक्ष्यों और सबूतों के साथ शिकायत मिली है कि पीबीएम के टेंडरों में चल रहे घोटालों के खेल में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात जो सामने आई है, वो यह है कि इस शिकायत के साथ पीबीएम के कई बड़े भ्रष्टाचारियों की 'आय से अधिक संपत्ति' और उनकी काली कमाई का पूरा ब्यौरा (डाटा) भी एसीबी के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है।

अंदर की बात: अस्पताल के इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों को बेईमानी की टेंडरों वाली फाइलों को लेकर उतनी टेंशन नहीं है, उन्हें तो एसीबी के पास पहुंचे अपनी काली कमाई के इस ब्यौरे और कुंडली का डर ज्यादा सता रहा है। मगर फिलहाल... सब खैरियत है।


3. धुआंधार एक्शन में बीकानेर की खाकी; पर बीछवाल के होटल-बार कांड पर क्यों साधी है चुप्पी?

​अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम कर रही बीकानेर पुलिस इन दिनों पूरे फॉर्म में है। खाकी फौज की टीमें प्रतिदिन नामी-गिरामी गुनाहगारों को पकड़कर अंदर टिका रही हैं। मजे की बात तो यह है कि गुनाहगारों को सिर्फ पकड़ा ही नहीं जा रहा, बल्कि हवालात में उनकी 'सर्विस' भी अच्छे से की जा रही है। खाकी के इस धुआंधार एक्शन से अपराध जगत के कई माफिया और बदमाश अपने ठिकाने छोड़कर भाग छूटे हैं और अब आम लोग भी यह मानने लगे हैं कि अपराधियों में खाकी का खौफ नजर आने लगा है।

अंदर की बात: इस शानदार परफॉर्मेंस के बीच हैरानी इस बात को लेकर है कि अपराधियों को ढूंढ-ढूंढ कर दबोच रही हमारी पुलिस ‘खाकी के उन गुनाहगारों’ को अभी तक डिटेन (गिरफ्तार) नहीं कर पाई है, जिन्होंने कुछ दिनों पहले बीछवाल इलाके की एक होटल-बार में घुसकर सरेआम आपराधिक कांड को अंजाम दिया था। इस एक खास मामले में कप्तान साहब ने भी रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी है। मरुधरा के लोग पूछ रहे हैं कि यहाँ ढिलाई क्यों? मगर फिलहाल... सब खैरियत है।


4. माल-ए-मुफ्त से करोड़ों की कमाई; बीकानेर के धोरों में बेपरवाह चल रहा अवैध खनन का खेल

​बीकानेर शहर के आस-पास के ग्रामीण और मरुस्थलीय इलाकों में इन दिनों धोरों का सीना चीरकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। बालू और बजरी माफिया जेसीबी (JCB) मशीनों से दिन-रात धोरों की बेतरतीब खुदाई कर माल-ए-मुफ्त से करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

​अवैध खनन का यह सारा काला खेल शासन-प्रशासन और खनिज विभाग के जिम्मेदार अफसरों की आंखों के ठीक सामने चल रहा है। वहीं, मरुधरा के पर्यावरण संरक्षक आरोप लगा रहे हैं कि 'अवैध खनन' के इस खेल में खनिज विभाग के जिम्मेदारों की तगड़ी सांठगांठ और हिस्सेदारी है।

अंदर की बात: हैरानी की बात तो यह है कि इस अवैध धंधे की लिखित शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंचने के बाद भी स्थानीय जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। ऐसे में अब खुलकर माना जा रहा है कि यह सारा खेल ïऊपर बैठे बड़े आकाओं की शह पर ही फल-फूल रहा है। इसीलिए फिलहाल... सब खैरियत है।

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