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बीकानेर सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी बैरक में बंदी दीपक ने लगाया फंदा; 2 दिन पहले किया था साथी कैदी पर जानलेवा हमला

India-1stNews



​— हाई-सिक्योरिटी जेल में हड़कंप: राजस्थान की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार बीकानेर सेंट्रल जेल में शनिवार तड़के करीब 4 बजे हुआ वाकया; सूरतगढ़ निवासी बंदी के सुसाइड से जेल प्रशासन में मचा हड़कंप।

​— 2 दिन पहले हुआ था हिंसक: जेल अधीक्षक अभिषेक शर्मा ने बताया— गंभीर मनोरोगी था मृतक बंदी; गुरुवार को साथी कैदी पर खूनी हमले के बाद सुरक्षा के लिहाज से रखा गया था पृथक (आइसोलेशन) सेल में।

​— सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल: पहले भी सुसाइड का प्रयास कर चुके अति-संवेदनशील कैदी पर सीसीटीवी (CCTV) और प्रहरियों की मुस्तैदी के बावजूद नजर रखने में कहां हुई चूक? न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होगी जांच।

बीकानेर, 30 मई (शनिवार)। राजस्थान की सबसे सुरक्षित और आधुनिक मानी जाने वाली बीकानेर सेंट्रल जेल की आंतरिक सुरक्षा और निगरानी तंत्र को धत्ता बताते हुए एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ जेल परिसर के भीतर एक विशेष पृथक सेल (आइसोलेशन बैरक) में बंद विचाराधीन बंदी दीपक कुमार ने शनिवार अलसुबह फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

​मृतक बंदी मूल रूप से श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ का रहने वाला था। इस वीवीआईपी जेल के भीतर एक अति-संवेदनशील कैदी द्वारा जेल प्रहरियों के पहरे के बीच सुसाइड कर लिए जाने की खबर से जयपुर तक जेल महकमे में हड़कंप मच गया है।

सुबह 4 बजे की गश्त में प्रहरियों ने देखा तो उड़ गए होश

​जेल प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी दुखद घटना शनिवार सुबह लगभग 4:00 बजे से 4:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। रोजमर्रा की तरह जब सेंट्रल जेल के सुरक्षा प्रहरी सुबह की शिफ्ट बदलने के समय गश्त, बैरकों की गिनती और रूटीन निरीक्षण के लिए निकले, तो उन्होंने विशेष पृथक सेल के भीतर दीपक कुमार को फंदे से लटका और अचेत अवस्था में पाया।

​प्रहरियों ने तुरंत इसकी सूचना मुख्य प्रहरी (चीफ वार्डन) और जेल की चिकित्सा विंग को दी। जेल के डॉक्टरों की टीम तुरंत सेल के भीतर पहुंची, लेकिन प्राथमिक तकनीकी और शारीरिक परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने दीपक कुमार को मृत घोषित कर दिया। इसके तुरंत बाद जेल मैनुअल और न्यायिक नियमों के तहत स्थानीय थाना पुलिस और संबंधित मजिस्ट्रेट को मामले की इत्तला दी गई।

जेल अधीक्षक अभिषेक शर्मा का बड़ा खुलासा: "2 दिन पहले साथी कैदी पर किया था जानलेवा हमला"

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बीकानेर सेंट्रल जेल के अधीक्षक अभिषेक शर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे और घटना स्थल का मुआयना किया। मीडिया से बातचीत में जेल अधीक्षक शर्मा ने एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि:

  • गंभीर मनोरोगी था मृतक: बंदी दीपक कुमार मानसिक रूप से अत्यंत अस्वस्थ (मनोरोगी) था और जेल की मेडिकल टीम की देखरेख में उसका बकायदा साइकियाट्रिक इलाज और थेरेपी चल रही थी।
  • गुरुवार का खूनी क्लेश: ठीक 2 दिन पहले यानी गुरुवार को दीपक कुमार ने अचानक हिंसक रूप अख्तियार करते हुए जेल के भीतर ही एक अन्य सह-बंदी (साथी कैदी) पर जानलेवा हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया था।
  • सुरक्षा के लिए किया था अलग: इस हिंसक व्यवहार और जेल के अन्य कैदियों की जान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही जेल प्रशासन ने दीपक कुमार को सामान्य बैरक से हटाकर एक विशेष 'पृथक सुरक्षित सेल' में शिफ्ट किया था, ताकि वह किसी और को नुकसान न पहुंचा सके।

पूर्व में भी कर चुका था सुसाइड का प्रयास, फिर भी सुरक्षा तंत्र फेल!

​इस पूरे मामले में जो सबसे बड़ा और गंभीर पहलू सामने आया है, वह यह है कि बंदी दीपक कुमार द्वारा आत्मघाती कदम उठाने का यह पहला मामला नहीं था। जेल रिकॉर्ड्स के अनुसार, वह पूर्व में भी जेल के भीतर और बाहर कई बार हिंसक व आत्मघाती व्यवहार प्रदर्शित कर चुका था और जान देने का असफल प्रयास कर चुका था।

​सूरतगढ़ के इस निवासी की इस मानसिक और आत्मघाती प्रवृत्ति के बारे में जेल प्रशासन भली-भांति वाकिफ था। इसके बावजूद, शनिवार तड़के जब पहरा बदलने और बैरकों के खुलने का समय होता है, उसी बीच उसने मौका पाकर इस खौफनाक घटना को अंजाम दे दिया, जिसने जेल की 24 घंटे की सीसीटीवी मॉनिटरिंग और सुरक्षा प्रहरियों की सजगता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।

मानवाधिकार आयोग के नियम लागू: न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में वीडियोग्राफी के साथ होगा पोस्टमार्टम

​जेल अभिरक्षा में हुई इस मौत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और जेल नियमावली के कड़े दिशानिर्देशों के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

​बीकानेर जिला प्रशासन द्वारा नामित न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सेंट्रल जेल पहुंचकर घटना स्थल (पृथक सेल) का मौका मुआयना किया और आवश्यक पंचनामा तैयार करवाया। इसके साथ ही, पुलिस और जेल प्रशासन ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी मौके पर बुलाया, जिसने बैरक के भीतर से आवश्यक भौतिक, परिस्थितिजन्य और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि घटना में कोई अन्य संदेहास्पद पहलू तो नहीं है।

परिजनों को दी सूचना: बंदी दीपक कुमार के शव को कड़ी सुरक्षा के बीच बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित भिजवा दिया गया है। प्रशासन ने मृतक के परिजनों को सूरतगढ़ में आधिकारिक सूचना दे दी है। परिजनों के बीकानेर पहुंचने के बाद मेडिकल बोर्ड और न्यायिक मजिस्ट्रेट की प्रत्यक्ष मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसकी पूरी वीडियोग्राफी भी करवाई जाएगी।


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