Mobile Logo Settings

Mobile Logo Settings

बीकानेर के बहुचर्चित शाहरुख हत्याकांड: मुख्य आरोपी मनरूप विश्नोई को कोर्ट से झटका; जमानत याचिका खारिज

India-1stNews



​— जमानत अर्जी नामंजूर: अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-5 बीकानेर की अदालत ने अपराध की गंभीरता और गवाहों के बयानों को देखते हुए आरोपी को राहत देने से किया साफ इनकार।

​— 2024 का खूनी खेल: शोभासर से लौट रही बारात की गाड़ी को घेरकर बदमाशों ने की थी फायरिंग और शाहरुख को लाठी-पाइपों से पीट-पीटकर उतार दिया था मौत के घाट।

​— गवाहों को प्रभावित करने का डर: सरकारी पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है; जमानत मिलने पर वह गवाहों को डरा-धमका सकता है।

​बीकानेर, 29 मई (शुक्रवार)। बीकानेर शहर के बीछवाल थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित और सनसनीखेज शाहरुख हत्याकांड के मामले में जेल में बंद आरोपी मनरूप विश्नोई को अदालत से बड़ा झटका लगा है। बीकानेर के अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-5 की अदालत ने मामले की गंभीरता, दोनों पक्षों की पुरानी रंजिश और कोर्ट में लंबित महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए आरोपी मनरूप विश्नोई की पहली नियमित जमानत याचिका (Bail Application) को सिरे से खारिज कर दिया है।

​अदालत ने अपने कड़े आदेश में स्पष्ट किया है कि हत्या जैसे संगीन मामलों में ट्रायल के इस मोड़ पर आरोपी को जेल से बाहर भेजना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।

​शोभासर से बारात लौटते समय फिल्मी अंदाज में किया था मर्डर

​अभियोजन पक्ष और पुलिस फाइलों के अनुसार, यह खूनी खेल 3 जुलाई 2024 को खेला गया था। शोभासर गांव से बीकानेर की तरफ लौट रही बारातियों से भरी एक बोलेरो कैंपर गाड़ी को घात लगाकर बैठे बदमाशों ने दो अलग-अलग वाहनों से बीच रास्ते में फिल्मी अंदाज में घेर लिया था।

​आरोप है कि हमलावरों ने पहले कैंपर गाड़ी को टक्कर मारकर रुकवाया, फिर दहशत फैलाने के लिए अंधाधुंध फायरिंग की। इसके बाद मुख्य टारगेट शाहरुख को जबरन गाड़ी से बाहर घसीटा गया और उस पर लाठी-डंडों, सरियों व लोहे के पाइपों से तब तक वार किए गए जब तक वह अधमरा नहीं हो गया। वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल शाहरुख को बेहतर इलाज के लिए बीकानेर से जयपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद बीछवाल पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी।

​बचाव पक्ष की दलील— 'FIR में नाम नहीं, राजनीतिक द्वेषता में फंसाया'

​जमानत याचिका पर बहस के दौरान आरोपी मनरूप विश्नोई के बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने दलील दी कि:

  • ​मूल एफआईआर (FIR) में मनरूप विश्नोई का नाम नामजद नहीं था।
  • ​अनुसंधान के दौरान किसी भी चश्मदीद गवाह ने सीधे तौर पर घटना के वक्त मनरूप की मौके पर मौजूदगी या उसकी सीधी संलिप्तता की बात नहीं कही है।
  • ​आरोपी 25 जून 2025 से लगातार न्यायिक हिरासत (जेल) में बंद है और पुलिस द्वारा उससे किसी भी प्रकार के हथियार या वाहन की बरामदगी नहीं की जानी है। ऐसे में उसे जेल में रखना उचित नहीं है।

​अपर लोक अभियोजक शिव शंकर स्वामी ने कोर्ट में रखीं कड़ी दलीलें

​बचाव पक्ष की दलीलों का कड़ा विरोध करते हुए सरकार की तरफ से अपर लोक अभियोजक संख्या-5 बीकानेर शिव शंकर स्वामी ने कोर्ट के सामने पुख्ता साक्ष्य रखे। एपीपी शिव शंकर स्वामी ने अदालत को बताया कि यह दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश का बेहद गंभीर मामला है। आरोपी मनरूप विश्नोई का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी पाक-साफ नहीं है, उसके खिलाफ पूर्व में भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

​सरकारी वकील ने आशंका जताई कि इस केस के कई महत्वपूर्ण और मुख्य गवाहों के बयान अदालत में होने अभी बाकी हैं। ऐसे में यदि इस स्टेज पर आरोपी को जमानत का लाभ देकर जेल से रिहा किया जाता है, तो वह बाहर आकर गवाहों को डरा-धमका सकता है, साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है या फरार हो सकता है।

​अदालत ने सरकारी वकील शिव शंकर स्वामी की दलीलों और पुलिस डायरी के साक्ष्यों से सहमति जताते हुए माना कि शाहरुख की बर्बरता से की गई हत्या के इस मामले में आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। गवाहों की सुरक्षा और न्याय की शुचिता को सर्वोपरि मानते हुए न्यायाधीश ने मनरूप विश्नोई की जमानत अर्जी को खारिज करने का आदेश सुनाया।

Post a Comment

0 Comments

📰 India First News — विज्ञापन एवं न्यूज़ देने के लिए संपर्क करें: 8562008562
Advertisement
Advertisement