— सड़कों पर रेंगने को मजबूर: राजस्थान एकीकृत शारीरिक शिक्षक संघ के बैनर तले अपनी जायज मांगों को लेकर चयनित अभ्यर्थियों ने सड़कों पर दंडवत (पेट के बल लेटकर) यात्रा निकालकर सरकार के खिलाफ जताया अनूठा रोष।
— 9 महीने से अटकी फाइल: भर्ती में चयन के बाद प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा काल) पूरा हुए 9 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शिक्षा विभाग ने अब तक न तो स्थाईकरण (कन्फर्मेशन) के आदेश जारी किए हैं और न ही नियमित वेतन दिया है।
— ईमानदारों के साथ अन्याय क्यों?: संघ का आरोप है कि एसओजी (SOG) जांच की आड़ में शिक्षा निदेशालय ईमानदार अभ्यर्थियों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।
बीकानेर, 27 मई (बुधवार)। राजस्थान में पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 (PTI Recruitment 2022) में पूरी ईमानदारी और कड़ी मेहनत से चयनित हुए शारीरिक शिक्षकों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय के सामने पिछले एक सप्ताह से लगातार आंदोलन कर रहे इन अभ्यर्थियों ने बुधवार को सरकार और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद उड़ाने के लिए सड़कों पर 'दंडवत प्रदर्शन' किया। भीषण गर्मी और तपती सड़कों पर पेट के बल लेटकर रेंगते हुए इन शारीरिक शिक्षकों ने सरकार से तुरंत स्थाईकरण और नियमित वेतन के आदेश जारी करने की गुहार लगाई।
राजस्थान एकीकृत शारीरिक शिक्षक संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के सात दिन बीत जाने के बाद भी सरकार या शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिससे अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रोबेशन पूरा हुए 9 महीने बीते, पर नहीं मिला नियमित वेतन: डॉ. सांगवा
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राम प्रकाश सांगवा ने विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डॉ. सांगवा ने बताया कि:
"पीटीआई भर्ती 2022 में चयनित सभी शारीरिक शिक्षकों का दो साल का प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा काल) पूरा हुए आज 9 महीने से ज्यादा का लंबा समय बीत चुका है। नियमानुसार प्रोबेशन पूरा होते ही स्थाईकरण और नियमित वेतन श्रृंखला के आदेश जारी हो जाने चाहिए थे, लेकिन विभाग ने अब तक इस पर कुंडली मार रखी है। अधिकारी एसओजी (SOG) जांच का बहाना बनाकर हमारी फाइलों को अटकाए बैठे हैं।"
सांगवा ने आगे स्पष्ट किया कि भर्ती में शामिल 200 से अधिक जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए गए थे, विभाग उन्हें पहले ही चिन्हित कर नौकरी से हटा चुका है। ऐसे में जो अभ्यर्थी पूरी तरह योग्य और ईमानदार हैं, उन्हें जांच की आड़ में आखिर कब तक प्रताड़ित किया जाएगा? इस संबंध में संघ का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में धरना देने से लेकर शिक्षा निदेशक और शासन सचिव तक गुहार लगा चुका है, लेकिन हर जगह से केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे हैं।
यह हमारे सम्मान और भविष्य की लड़ाई है: खेमाराम नैण
संघ के प्रदेश मुख्य महामंत्री खेमाराम नैण ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह विरोध प्रदर्शन केवल एक साधारण धरना नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के सैकड़ों शारीरिक शिक्षकों के आत्मसम्मान, सुरक्षित भविष्य, स्थाईकरण और उनके जायज अधिकारों की सीधी लड़ाई है।
महामंत्री नैण ने मांग की है कि भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वाले संदिग्ध परीक्षा केंद्रों (सेंटर्स) और माफियाओं पर सरकार और एसओजी जितनी चाहे उतनी कठोर कार्रवाई करे, लेकिन उसकी सजा दिन-रात मेहनत कर चयनित हुए बेकसूर और ईमानदार अभ्यर्थियों को क्यों दी जा रही है? यदि विभाग ने शीघ्र ही स्थाईकरण के आदेश जारी नहीं किए, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की होगी।

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