— झूठे मुकदमों पर पुलिस का कड़ा पहरा: आपसी रंजिश के चलते विरोधियों को फंसाने और पुलिस का समय बर्बाद करने वालों के खिलाफ राजस्थान पुलिस का अभियान बेहद कारगर।
— अदालतों ने सुनाई सख्त सजा: जून महीने में प्रदेश की विभिन्न अदालतों ने 75 मामलों में शिकायतकर्ताओं को दोषी मानकर जेल और जुर्माने दोनों की सजा सुनाई।
— संस्थागत सोच में आया बड़ा बदलाव: अब केवल 'एफआर' (Final Report) लगाकर फाइल बंद नहीं होगी, बल्कि झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले पर खुद पुलिस केस चलाएगी।
— नागौर-जयपुर आगे, बीकानेर में भी कार्रवाई: फर्जी शिकायतों पर एक्शन लेने में नागौर 292 मामलों के साथ सबसे आगे; बीकानेर में भी एक मामले में हुई बड़ी कानूनी कार्रवाई।
— पूरे देश में लागू होगा राजस्थान मॉडल: बेवजह के मुकदमों और पुलिस-अदालतों पर अनावश्यक दबाव कम करने वाले इस अभियान को अब देश भर में शुरू करने की तैयारी।
बीकानेर/जयपुर, 9 जुलाई (गुरुवार)। आपसी रंजिश, जमीनी विवाद या व्यक्तिगत खुन्नस का बदला लेने के लिए विरोधी पक्ष के खिलाफ झूठी एफआईआर (FIR) दर्ज करवाकर पुलिस और न्यायपालिका की सिरदर्दी बढ़ाने वाले शातिर लोगों पर राजस्थान पुलिस का कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस गया है। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के बाद प्रदेश भर के थानों में फर्जी एफआईआर दर्ज होने के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस अभियान के तहत पुलिस केवल जांच करके रुक नहीं रही, बल्कि झूठी शिकायत करने वालों को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज रही है।
अदालतों ने 1,870 मामलों पर लिया संज्ञान, 75 जालसाजों को जेल और जुर्माना
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस कड़े अभियान के तहत अकेले जून महीने में ही राजस्थान की विभिन्न अदालतों ने 75 ऐसे मामलों में फैसला सुनाया, जहां शिकायत पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठी पाई गई थी। इन सभी 75 मामलों में अदालतों ने शिकायतकर्ताओं को ही दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल और आर्थिक जुर्माने दोनों की सख्त सजा से दंडित किया है। इसके अलावा, करीब 1,870 ऐसे अन्य मामलों में भी अदालतों ने कड़ा संज्ञान लिया है, जहां पुलिस की गहन जांच में शिकायतें और आरोप पूरी तरह फर्जी पाए गए थे।
नागौर में सबसे ज्यादा 292 फर्जी शिकायतकर्ताओं पर गिरी गाज; बीकानेर में भी एक्शन
झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर कानून का मजाक बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में मरुधरा के अलग-अलग जिलों में पुलिस ने पूरी मुस्तैदी दिखाई है:
- नागौर जिला: फर्जी शिकायतकर्ताओं के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए नागौर पुलिस ने रिकॉर्ड 292 मामलों में एक्शन लिया है।
- जयपुर ग्रामीण: इस फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर रहे जयपुर ग्रामीण में 247 मामलों में कार्रवाई की गई।
- अलवर जिला: अलवर में पुलिस और कोर्ट ने 212 मामलों में झूठे मुकदमों के खिलाफ कानूनी डंडा चलाया है।
- बीकानेर जिला: बीकानेर में भी पुलिस की जांच के बाद एक ऐसे ही गंभीर मामले में फर्जी शिकायतकर्ता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।
एफआर (FR) संस्कृति का अंत: अब पुलिस खुद करेगी मुकदमा
राजस्थान पुलिस के इस अभियान का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण असर पुलिस की 'संस्थागत सोच' में आए बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कई दशकों से यह परिपाटी चल रही थी कि पुलिस किसी मामले की जांच पूरी होने के बाद शिकायत को झूठा या तथ्यहीन पाते हुए केवल अंतिम रिपोर्ट (FR - Final Report) दाखिल कर कोर्ट में फाइल बंद कर देती थी। इससे झूठा आरोप लगाने वाले साफ बच निकलते थे।
लेकिन अब नए नियमों और इस अभियान के तहत, एफआर लगाने के साथ ही झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले मूल शिकायतकर्ता के खिलाफ पुलिस खुद कानून की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत के कटघरे में खड़ा कर रही है।
पुलिस और अदालतों का बोझ होगा कम; अब देश भर में लागू होगा राजस्थान का यह अभियान
इस सराहनीय कदम से जहां एक ओर आम नागरिकों में कानून का खौफ पैदा होगा और बेवजह के आपराधिक मुकदमों पर प्रभावी रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर पुलिस और अदालतों पर रहने वाला मुकदमों का अनावश्यक और अतिरिक्त दबाव भी काफी कम होगा। राजस्थान पुलिस द्वारा अपराधियों और कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ शुरू किए गए इस अभिनव और बेहद सफल अभियान की सफलता को देखते हुए, अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है और केंद्र सरकार व गृह मंत्रालय की ओर से इस सफल 'राजस्थान मॉडल' को अब देश भर के अन्य राज्यों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है।

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