— फिल्मी स्टाइल में बिछाया जाल: पुलिस कांस्टेबल गणेशाराम ट्रैक्टर चालक बनकर घुसे सोलर प्लांट में; शिनाख्त के बाद पुलिस टीम ने मारी रेड।
— पहचान छिपाकर कर रहा था मजदूरी: 24 वर्षीय भींयाराम उर्फ भीमला उर्फ भीमा नायक (नागौर) पुलिस से बचने के लिए सोलर प्लांट में काट रहा था फरारी।
— टेक्नोलॉजी को दे रहा था मात: लोकेशन ट्रेस होने से बचने के लिए मोबाइल का करता था बेहद सीमित इस्तेमाल; हर बार नए फोन से करता था बात।
— अपराधों का लंबा ट्रेक रिकॉर्ड: हत्या के प्रयास, लूट और वाहन चोरी जैसे कई गंभीर मामलों में था वांछित; कोटवाली थाने का स्थायी वारंट भी था लंबित।
बीकानेर, 16 जुलाई (गुरुवार)। बीकानेर की कोटगेट थाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे ₹2,500 के एक शातिर इनामी बदमाश को गिरफ्तार करने में बहुत बड़ी और फिल्मी अंदाज की सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपी नागौर और बीकानेर के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, सरेराह लूट और वाहन चोरी जैसी गंभीर संगीन वारदातों में वांछित चल रहा था। पुलिस से बचने के लिए आरोपी एक सोलर प्लांट में छिपकर मजदूरी का काम कर रहा था, जिसे पकड़ने के लिए कोटगेट पुलिस को बकायदा रूप बदलकर एक खुफिया ऑपरेशन चलाना पड़ा।
जब पुलिसकर्मी बना ट्रैक्टर ड्राइवर; सोलर प्लांट के अंदर हुआ ड्रामा
कोटगेट थानाधिकारी विक्रम तिवाड़ी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष तकनीकी और फील्ड टीम का गठन किया गया था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी भींयाराम उर्फ भीमला उर्फ भीमा नायक (24 वर्ष, निवासी— जायल, नागौर) अपनी पहचान छिपाकर एक बड़े सोलर प्लांट के भीतर बतौर मजदूर काम कर रहा है। प्लांट में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित होने के कारण पुलिस ने एक अनूठी रणनीति बनाई।
कोटगेट थाने के जांबाज कांस्टेबल गणेशाराम को बकायदा एक स्थानीय ट्रैक्टर चालक का रूप दिया गया। गणेशाराम ट्रैक्टर चलाते हुए सोलर प्लांट के भीतर दाखिल हुए और सामान्य कामगारों की तरह घुल-मिल गए। प्लांट के अंदर रहकर उन्होंने बेहद बारीकी से इनामी बदमाश भींयाराम की सटीक पहचान की और बाहर घात लगाकर बैठी पुलिस टीम को गुप्त सिग्नल (सूचना) दे दिया। हरी झंडी मिलते ही थानाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने प्लांट में दबिश देकर आरोपी को चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया।
लोकेशन छिपाने के लिए करता था 'वन-टाइम' मोबाइल का इस्तेमाल
पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि भींयाराम एक शातिर किस्म का अपराधी है, जो पुलिस की तकनीकी सर्विलांस (Cyber Cell) की कार्यप्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ था। वह गिरफ्तारी और पुलिस इनपुट से बचने के लिए अपने पर्सनल मोबाइल फोन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करता था।
वह जब भी अपने परिजनों या परिचितों से संपर्क करना चाहता था, तो किसी राहगीर या मजदूर का मोबाइल मांगता था या 'वन-टाइम यूज' (एक बार इस्तेमाल होने वाले) सस्ते कीपैड फोन और सिम कार्ड का सहारा लेता था। बात खत्म होते ही वह फोन बंद कर देता था, जिससे साइबर पुलिस उसकी सही लोकेशन ट्रेस नहीं कर पा रही थी। लेकिन पुलिस के मानवीय इनपुट (ह्यूमन इंटेलिजेंस) के आगे उसकी यह चालाकी धरी की धरी रह गई।
लूट, मर्डर का प्रयास और चोरी का लंबा आपराधिक इतिहास
पकड़े गए इनामी बदमाश भींयाराम के खिलाफ राजस्थान के कई थानों में गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। कोटगेट थाने के अलावा नागौर के परबतसर, पादूकलां तथा एमपी नगर थानों में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास (अटेम्प्ट टू मर्डर) और लूटपाट के मुकदमे लंबित हैं। इसके अलावा बीकानेर के कोतवाली थाने से उसका एक स्थायी वारंट भी काफी समय से पेंडिंग चल रहा था।
2025 की चोरी की बाइक से खोली जुर्म की कुंडली
इस पूरी हिस्ट्री का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी ने वर्ष 2025 में बीकानेर के बीछवाल थाना क्षेत्र से एक मोटरसाइकिल चोरी की थी। इसके बाद उसने उसी चोरी की बाइक का इस्तेमाल नागौर के पादूकलां इलाके में एक बड़ी लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए किया।
वारदात के बाद जब वह भाग रहा था, तब बीकानेर के मुक्ताप्रसाद नगर क्षेत्र में उसकी वह मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई। भींयाराम पुलिस के डर से बाइक को मौके पर ही छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला था। पुलिस ने जब उस लावारिस बाइक की कड़ियां जोड़ीं और मुक्ताप्रसाद क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तब जाकर भींयाराम का चेहरा और पहचान पुलिस के सामने आई थी, जिसके बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश में राजस्थान और सीमावर्ती इलाकों में खाक छान रही थी।
इस बेहद सफल और सूझबूझ भरे ऑपरेशन में कोटगेट थानाधिकारी विक्रम तिवाड़ी, हेड कांस्टेबल हेतराम तथा कांस्टेबल गणेशाराम की विशेष और निर्णायक भूमिका रही। कांस्टेबल गणेशाराम की त्वरित बुद्धिमत्ता के लिए महकमे की ओर से उन्हें विशेष रूप से पुरस्कृत करने की अनुशंसा की जा रही है।

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