— नशे की लत पर गंभीर सवाल: घर से मिला 'कोरेस एराज-एक्स' (Kores Eraz-ex) और व्हाइटनर; जानकारों के मुताबिक इसे सूंघने का खतरनाक नशा बन रहा युवाओं की जान का दुश्मन।
— पुलिस जांच में जुटी: सूचना मिलते ही मुक्ता प्रसाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया।
— मेडिकल स्टोर्स पर भी उठे सवाल: प्रतिबंधित इंजेक्शनों और नशीली दवाओं की अवैध बिक्री को लेकर शहर में आमजन में रोष; पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज।
बीकानेर, 16 अगस्त। बीकानेर में नशे की गिरफ्त में आकर एक और हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया है। शहर में युवाओं के बीच लगातार बढ़ रही नशे की लत एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ताजा मामला मुक्ता प्रसाद थाना क्षेत्र का है, जहां रविवार सुबह एक खंडहरनुमा क्वार्टर में करीब 25 वर्षीय युवक का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतक की पहचान अजय मौर्य पुत्र रामलखन मौर्य, निवासी मुक्ता प्रसाद के रूप में हुई है। हालांकि पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो पाएगी, लेकिन मौके और स्थानीय हालात को देखकर इसे नशे की लत से जोड़कर देखा जा रहा है।
खंडहरनुमा क्वार्टर में मिला शव और मौके से मिले संकेत
जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 10:45 बजे पुराना हाउसिंग बोर्ड कार्यालय स्थित आवासन मंडल के एक खंडहरनुमा क्वार्टर में युवक के मृत अवस्था में पड़े होने की सूचना मिली थी। खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलने पर खिदमतगार खादिम सोसाइटी और असहाय सेवा संस्थान के सेवादार तुरंत एम्बुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे। मुक्ता प्रसाद थाना पुलिस की मौजूदगी में शव को पीबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों द्वारा मुआयना करने के बाद शव को अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
व्हाइटनर और सॉल्वेंट का खतरनाक नशा बना जानलेवा
घटनास्थल के पास से कोरेस एराज-एक्स (Kores Eraz-ex) मिलने की बात सामने आई है। जानकारों के अनुसार, यह कोई पीने वाली दवा नहीं है, बल्कि कागज पर लिखी स्याही मिटाने वाला सुधारक तरल (Correction Fluid/Whitener) है। इसमें कुछ खास तरह के जहरीले और उड़ने वाले विलायक (Volatile Solvents) होते हैं।
जब युवा या बच्चे इसे सूंघते (Sniffing करते हैं), तो इसके केमिकल्स सीधे फेफड़ों के जरिए दिमाग तक पहुंचते हैं। इससे दिमाग की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है, जिससे कुछ समय के लिए भ्रम, मतिभ्रम (Hallucinations) और एक झूठी खुशी या 'हाई' (High) का अहसास होता है। इसी फौरी मजे के चक्कर में युवा इसकी गंभीर लत का शिकार हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर और मानसिक संतुलन को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
मेडिकल स्टोर्स पर भी उठ रहे गंभीर सवाल
स्थानीय स्तर पर इस घटना के बाद एक बार फिर शहर में खुलेआम बिक रहे नशीले पदार्थों, प्रतिबंधित इंजेक्शनों और इस तरह के सॉल्वेंट्स को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जो दवाइयां और इंजेक्शन आधिकारिक तौर पर बंद हैं या जिन पर प्रतिबंध है, वे आखिर नशेड़ियों तक कैसे पहुंच रहे हैं? चर्चा है कि शहर के कुछ बेईमान मेडिकल स्टोर संचालक अवैध रूप से चोरी-छिपे ये खतरनाक सामग्रियां मंगवाते हैं और अपनी तिजोरी भरने के लिए युवाओं को बेच रहे हैं। शौक और नशे की यह आदत युवाओं की जिंदगी को तबाह कर रही है, जिसके चलते आए दिन घरों के चिराग बुझ रहे हैं।

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