— गंभीर आरोप: कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा सुनेना सोनी ने स्कूल प्रबंधन पर फीस बकाया का हवाला देकर टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) और अंकतालिका करीब 4 महीने तक रोकने का गंभीर आरोप लगाया है।
— शैक्षणिक वर्ष पर संकट: समय पर दस्तावेज न मिलने के कारण छात्रा दूसरे विद्यालय में प्रवेश और 10वीं बोर्ड परीक्षा के पुनः आवेदन की समय-सीमा से चूक गई, जिससे उसका एक पूरा साल खराब होने की कगार पर है।
— प्रशासन से न्याय की मांग: एडवोकेट अनिल सोनी के माध्यम से जिला कलेक्टर को दी गई शिकायत में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर से विशेष अनुमति दिलाकर पुनः आवेदन का अवसर देने और विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।
बीकानेर: जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा ने स्कूल प्रबंधन पर समयानुसार टीसी और अंकतालिका न देने के कारण उसका एक साल बर्बाद करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में जिला कलेक्टर को औपचारिक शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई गई है।
4 महीने तक रोके रखे शैक्षणिक दस्तावेज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रा सुनेना सोनी पुत्री जगदीश प्रसाद सोनी ने सेंट श्री खेतेश्वर एजुकेशन सोसायटी विद्यालय, बीकानेर से कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई की थी। पारिवारिक परिस्थितियों और मानसिक तनाव के कारण पढ़ाई प्रभावित होने से कक्षा 10 में उसकी सप्लीमेंट्री आ गई थी।
छात्रा का आरोप है कि इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने फीस बकाया होने का हवाला देते हुए उसकी टीसी और अंकतालिका लगभग 4 महीने तक रोक कर रखी और समय पर उपलब्ध नहीं कराई। दस्तावेज समय पर न मिलने के कारण वह किसी अन्य विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाई और बोर्ड परीक्षा के पुनः आवेदन की अंतिम तिथि भी निकल गई। आरोप है कि विलंब शुल्क के साथ आवेदन की मियाद गुजर जाने के बाद, करीब चार दिन पहले स्कूल ने उसे दस्तावेज सौंपे।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से विशेष अनुमति की मांग
इस पूरे मामले को लेकर एडवोकेट अनिल सोनी ने बताया कि स्कूल की इस लापरवाही और दस्तावेजों की देरी से आपूर्ति के कारण छात्रा 10वीं बोर्ड की पूरक/पुनः परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो गई है।
छात्रा ने जिला प्रशासन के माध्यम से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी के जरिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर को भेजी जाए। साथ ही, विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड से विशेष अनुमति दिलाई जाए ताकि वह 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पुनः आवेदन कर सके। इसके अलावा, यदि दस्तावेज रोकने में किसी भी नियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

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