– बड़ा एक्शन: हजारों बीघा जमीन हड़पने का मामला; आईजी हेमंत शर्मा के निर्देश पर ADSP रघुवीर शर्मा ने कसा शिकंजा, पूरे जिले के पटवारियों में हड़कंप
– अब बड़े अफसरों की बारी: पटवारी-गिरदावर के बाद अब तत्कालीन तहसीलदार और नायब तहसीलदार रडार पर; मार्च 2024 में 112 लोगों पर दर्ज हुआ था मुकदमा
बीकानेर/छत्तरगढ़, 30 जनवरी (शुक्रवार)। बीकानेर के बहुचर्चित छत्तरगढ़ जमीन आवंटन घोटाले (Land Scam) में शुक्रवार को पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विधानसभा सत्र के दौरान हुई इस कार्रवाई ने पूरे जिले के राजस्व विभाग (Revenue Department) में हड़कंप मचा दिया है।
मामले की जांच कर रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ADSP) रघुवीर शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 4 पटवारियों और 3 गिरदावरों (कुल 7 कार्मिकों) को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर हजारों बीघा जमीन का फर्जी आवंटन करने का आरोप है।
इन 7 'सरकारी नटवरलालों' की हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने लंबी जांच और पूछताछ के बाद शुक्रवार को निम्नलिखित कार्मिकों को गिरफ्तार किया:
- सुंदर लाल जालप: पटवारी, पटवार मंडल मैनसर।
- अजेन्द्र सिंह भाटी: तत्कालीन पटवारी, हाल गिरदावर (लीव रिजर्व)।
- विरेन्द्र सिंह: पटवारी, पटवार मंडल हाडला भाटीयान।
- जसवीर सिंह: पटवारी, पटवार मंडल उड़सर (तहसील जसरासर)।
- रमेश कुमार पुरोहित: (राजस्व कार्मिक)
- महेन्द्र सिगड: (रासीसर निवासी, राजस्व कार्मिक)
- सतपाल: (राजस्व कार्मिक)
आईजी की निगरानी में खुला राज
इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जांच रेंज आईजी कार्यालय से ADSP स्तर के अधिकारी को सौंपी गई थी। बीकानेर रेंज आईजी हेमंत शर्मा इस मामले की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ADSP रघुवीर शर्मा ने इन सभी को पूछताछ के लिए बुलाया था। सबूत सामने रखने पर ये संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या है पूरा घोटाला?
यह मामला मार्च 2024 में सामने आया था।छत्तरगढ़ के तत्कालीन तहसीलदार ने 112 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज करवाया था। आरोप था कि भू-माफिया और सरकारी कारिंदों ने मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हजारों बीघा सरकारी जमीन अपने और चहेतों के नाम करवा ली। एफआईआर में कुल 11 पटवारी, तत्कालीन नायब तहसीलदार और तहसीलदारों को नामजद किया गया था।
अब 'बड़ी मछलियों' पर गिरेगी गाज
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पटवारी और गिरदावरों की गिरफ्तारी तो महज शुरुआत है। जांच की आंच अब उस समय तैनात रहे तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों तक पहुंचनी तय मानी जा रही है। पुलिस जल्द ही उनसे भी कड़ी पूछताछ कर सकती है। विधानसभा सत्र चलने के कारण पुलिस पर इस मामले में ठोस कार्रवाई का दबाव भी था।

0 Comments