– शास्त्र सम्मत मुहूर्त: आज शाम 6:36 बजे से रात 9:00 बजे तक दहन का श्रेष्ठ समय; भद्रा काल में भी 'पुच्छ काल' का मिलेगा विकल्प।
– गणगौर पूजन का ध्यान: 3 मार्च की सुबह लग जाएगा ग्रहण का सूतक; महिलाओं और कन्याओं की सुविधा के लिए ज्योतिषाचार्यों ने सुझाया आज का दिन।
बीकानेर, 2 मार्च (सोमवार)।बीकानेर में इस वर्ष होलिका दहन की तारीख और समय को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर विराम लग गया है। रत्ताणी व्यास बगीची में जुटे शहर के दिग्गज ज्योतिषाचार्यों और पंडितों ने एकमत होकर आज (2 मार्च) को होलिका दहन और कल (3 मार्च) को धुलंडी मनाने का शास्त्रसम्मत सुझाव दिया है।
क्यों आज ही श्रेष्ठ है दहन?
ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र व्यास और हरिनारायण व्यास मन्नासा ने पंचांगों का हवाला देते हुए बताया:
- तिथि गणना: फाल्गुन पूर्णिमा तिथि आज शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च शाम 5:08 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में ही होलिका दहन श्रेष्ठ है, जो आज मिल रही है।
- भद्रा का विचार: हालांकि आज शाम से ही भद्रा शुरू हो जाएगी, लेकिन प्रदोष काल (शाम 6:36 से रात 9:00 बजे तक) में दहन किया जा सकता है। इसके अलावा रात 12:51 से 2:01 बजे तक 'भद्रा पुच्छ काल' में भी दहन का विधान है।
कल ग्रहण और सूतक का साया
पंडितों ने आज दहन चुनने के पीछे एक व्यावहारिक कारण भी बताया है।
- सूतक काल: 3 मार्च की सुबह 6:39 बजे से ग्रहण का सूतक लग जाएगा।
- गणगौर पूजन: बीकानेर में इन दिनों गणगौर का पूजन करने वाली कन्याओं और महिलाओं की बड़ी संख्या होती है। सूतक लगने के बाद धार्मिक अनुष्ठान और पूजन में कठिनाई होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए आज रात को ही दहन संपन्न करना उचित माना गया है।
पंडितों का मत और उपस्थिति
पंडित राजेंद्र किराडू ने भी स्पष्ट किया कि देश के अधिकांश पंचांगों में 3 मार्च को ही धुलंडी का उल्लेख है। बैठक के दौरान पंडित भगवान दास व्यास, भीया महाराज, आशाराम व्यास तथा संतश्री व्यास सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि आज बहनें अपने भाइयों पर माला (सूखनी) फेरने की रस्म दिनभर कभी भी कर सकती हैं।


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