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बीकानेर: जीवन रक्षा अस्पताल पर फिर लगा संगीन आरोप; नसबंदी ऑपरेशन के दौरान महिला की किडनी निकालने का दावा

India-1stNews



​– सनसनीखेज मामला: मुफ्त इलाज और रुपयों का लालच देकर करवाया नसबंदी ऑपरेशन; अब सोनोग्राफी में एक किडनी गायब होने का दावा।

पीड़ित की पीड़ा: फकीराराम ने एसपी मृदुल कच्छावा को सौंपी लिखित शिकायत; अस्पताल स्टाफ पर गुमराह करने का लगाया आरोप।

​– हॉस्पिटल का दावा: ट्यूबेक्टॉमी (नसबंदी) केवल 5-10 मिनट की प्रक्रिया; किडनी निकालने जैसे जटिल ऑपरेशन का कोई आधार नहीं।

संभावित कारण: अस्पताल प्रबंधन का तर्क—जन्मजात (बाय बर्थ) एक किडनी होना भी हो सकता है कारण; नैतिक चिकित्सा के प्रति जताई प्रतिबद्धता।

एसपी की जांच जारी: पीड़ित परिवार के आरोपों और अस्पताल के स्पष्टीकरण के बीच पुलिस खंगाल रही है मेडिकल रिकॉर्ड।

बीकानेर, 30 अप्रैल (गुरुवार)। बीकानेर का जीवन रक्षा अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। इस बार अस्पताल प्रबंधन पर नसबंदी ऑपरेशन की आड़ में महिला की किडनी निकालने जैसा रूह कंपा देने वाला आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है, जिसके बाद हड़कंप मच गया है।

नसबंदी के नाम पर 'खेल' का आरोप

फरियादी फकीराराम ने एसपी को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी पत्नी राधा देवी की नसबंदी इसी अस्पताल में करवाई थी। आरोप है कि उस दौरान अस्पताल की नर्स और स्टाफ ने उन्हें मुफ्त इलाज और सरकारी सहायता के तौर पर पैसे दिलाने का लालच देकर ऑपरेशन के लिए तैयार किया था। परिवार का आरोप है कि उन्हें अंधेरे में रखकर यह सब किया गया।

पेट दर्द ने खोला 'राज'

मामले का खुलासा तब हुआ जब 16-17 अप्रैल को राधा देवी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। परिजनों ने जब सोनोग्राफी करवाई, तो रिपोर्ट देखकर उनके होश उड़ गए। परिजनों का दावा है कि सोनोग्राफी रिपोर्ट में महिला की एक किडनी गायब पाई गई है। इसके बाद पीड़ित परिवार सीधे पुलिस अधीक्षक के पास पहुँचा और अस्पताल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

एसपी ने दिए सख्त जांच के आदेश

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए एसपी मृदुल कच्छावा ने तुरंत जांच के आदेश जारी किए हैं। पुलिस अब अस्पताल के ऑपरेशन रिकॉर्ड, उस समय के स्टाफ की ड्यूटी लिस्ट और महिला की वर्तमान मेडिकल रिपोर्ट का मिलान करेगी।

सनसनीखेज आरोपों के बाद अब अस्पताल प्रबंधन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। अस्पताल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'चिकित्सकीय रूप से असंभव' करार दिया है।

"नसबंदी और किडनी निकालने का कोई मेल नहीं"

अस्पताल प्रबंधन और डॉ. पवन चौधरी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) एक बेहद छोटी और सुरक्षित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा:

​"यह ऑपरेशन मात्र 5 से 10 मिनट में पूरा हो जाता है और मरीज 2 घंटे में डिस्चार्ज कर दिया जाता है। नसबंदी के दौरान शरीर के दूसरे हिस्से से किडनी निकालना मेडिकल साइंस के हिसाब से संभव ही नहीं है।"

जन्मजात कारण का दिया हवाला

सोनोग्राफी रिपोर्ट में किडनी नहीं दिखने के दावे पर अस्पताल ने तर्क दिया है कि दुनिया में कई लोग ऐसे होते हैं जिनके जन्म से ही एक किडनी होती है। अस्पताल का कहना है कि यह एक 'कंजेनिटल' (जन्मजात) स्थिति हो सकती है, जिसका पता महिला को अब पेट दर्द के बाद हुई सोनोग्राफी में चला हो। उन्होंने आरोपों को अस्पताल की छवि खराब करने की कोशिश बताया।

विवादों से पुराना नाता

यह पहली बार नहीं है जब जीवन रक्षा अस्पताल पर उंगली उठी है। इससे पहले भी इस अस्पताल पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और 'आयुष्मान' या अन्य योजनाओं में मुफ्त इलाज के बावजूद मरीजों से अवैध वसूली करने के आरोप लग चुके हैं। किडनी निकालने के इस दावे ने चिकित्सा जगत और शहर में सनसनी फैला दी है।

अब पुलिस की जांच दो मुख्य पहलुओं पर केंद्रित होगी:

  1. ​क्या ऑपरेशन से पहले महिला की कभी सोनोग्राफी हुई थी जिसमें दोनों किडनियाँ मौजूद थीं?
  2. ​क्या नसबंदी के छोटे से कट (Incision) के जरिए किडनी निकालना संभव है?

​फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन ने अपनी पारदर्शिता और नैतिकता का हवाला देते हुए जांच में पूर्ण सहयोग की बात कही है।


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