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बीकानेर: रफ्तार का कहर, मोबाइल वाले तमाशबीन और एक 'फरिश्ता'; भीषण हादसे में युवक की मौत, साथी की जान बचाने वाले इमरान ने लौटाए 4.50 लाख रुपए

India-1stNews



​– दर्दनाक मौत: एलआईसी ऑफिस के सामने ट्रैक्टर ने बाइक को रौंदा; घड़साना निवासी दिव्यांश की मौके पर ही मौत, साथी सुधीर गंभीर घायल।

– शर्मनाक मंजर: खून से लथपथ घायल तड़पता रहा, लोग मोबाइल से वीडियो बनाते रहे; किसी ने नहीं बढ़ाया मदद का हाथ।

– इंसानियत की मिसाल: इमरान अली ने घायल को पहुँचाया अस्पताल; बैग में मिले 4.50 लाख रुपए ईमानदारी से परिजनों को सौंपे।

​बीकानेर, 21 अप्रैल (मंगलवार)।बीकानेर-जयपुर हाईवे पर सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुए एक सड़क हादसे ने रूह कंपा दी। तेज रफ्तार ट्रैक्टर की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों की जिंदगी बिखर गई। लेकिन इस दर्दनाक घटना के बीच 'नई रोशनी जन कल्याण सेवा संस्थान' के अध्यक्ष इमरान अली की जांबाजी और ईमानदारी अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

​हादसे में उड़े बाइक के परखच्चे

​हादसा एलआईसी कार्यालय के सामने हुआ, जहाँ बजरंग प्रजापत नामक चालक ने लापरवाही से ट्रैक्टर चलाते हुए बाइक को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार घड़साना निवासी दिव्यांश की मौके पर ही मौत हो गई। बाइक चला रहा उसका साथी सुधीर बिश्नोई गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पने लगा। जेएनवीसी पुलिस ने ट्रैक्टर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

​तमाशबीनों के बीच 'उम्मीद की किरण' बने इमरान

​हादसे के बाद हाईवे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग घायल की मदद करने के बजाय अपने मोबाइल से वीडियो बनाने और फोटो खींचने में व्यस्त रहे। इसी दौरान वहाँ से गुजर रहे इमरान अली ने जब यह मंजर देखा, तो उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। इमरान ने लहूलुहान सुधीर को अपने वाहन में डाला और तुरंत पीबीएम अस्पताल पहुँचाया। समय पर इलाज मिलने से सुधीर की जान बच गई।

​ईमानदारी जिसने सबका दिल जीत लिया

​अस्पताल पहुँचने के बाद जब इमरान ने घायलों का बैग संभाला, तो उसमें करीब 4 लाख 50 हजार रुपए नकद मिले। आज के दौर में जहाँ लोग छोटी-सी चीज के लिए नियत डगमगा लेते हैं, वहीं इमरान ने एक-एक रुपया पूरी जिम्मेदारी के साथ सुधीर के परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

​शहर कर रहा सलाम

​जहाँ एक ओर बीकानेर दिव्यांश की अकाल मृत्यु पर शोक संतप्त है, वहीं इमरान अली की इस निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर इमरान जैसे लोग न होते, तो शायद सुधीर की जान भी न बच पाती।

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