- दुखद हादसा: सुबह 6 बजे पैर फिसलने से कुंड में गिरे शिक्षक मनोहरलाल सारस्वत; रात भर बेटी की शादी की रस्मों में रहे थे व्यस्त।
- शिक्षा जगत को क्षति: महर्षि जसनाथ बाल विद्या मंदिर के संस्थापक थे मनोहरलाल; गांव में 'दादा' के नाम से थे लोकप्रिय।
- गमगीन माहौल: शाम को आनी थी बारात, लेकिन विधाता को कुछ और ही था मंजूर; पूरे गांव की आंखें हुई नम।
बीकानेर (देशनोक), 27 अप्रैल (सोमवार)। कहते हैं खुशियों को नजर लगते देर नहीं लगती, लेकिन बरसिंहसर गांव में जो हुआ वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है। गांव के प्रतिष्ठित शिक्षक और समाजसेवी मनोहरलाल सारस्वत की रविवार सुबह अपने ही घर के पानी के कुंड में डूबने से अकाल मृत्यु हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब घर में उनकी बड़ी बेटी के विवाह की तैयारियां अंतिम चरण में थीं।
मेहंदी की रात बनी आखिरी मुलाकात
परिजनों ने बताया कि मनोहरलाल अपनी बड़ी बेटी की शादी को लेकर बेहद उत्साहित थे। शनिवार रात भर वे मेहंदी और अन्य वैवाहिक रस्मों में सगे-संबंधियों के साथ जश्न मनाते रहे। रविवार शाम को बारात आने वाली थी, लेकिन सुबह करीब 6 बजे किसी काम से जाते समय उनका पैर फिसल गया और वे सीधे पानी के कुंड में जा गिरे। जब तक परिजनों ने उन्हें बाहर निकाला, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
गांव के 'दादा' ने जगाई थी शिक्षा की अलख
मनोहरलाल सारस्वत केवल एक अभिभावक ही नहीं, बल्कि बरसिंहसर क्षेत्र के एक महान शिक्षाविद भी थे। उन्होंने महर्षि जसनाथ बाल विद्या मंदिर की स्थापना कर ग्रामीण आंचल में शिक्षा का उजियारा फैलाया था। गांव के लोग उन्हें सम्मान से 'दादा' पुकारते थे। उनके पढ़ाए हुए अनगिनत छात्र आज देश के विभिन्न ऊंचे पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।
खुशियां बदलीं चित्कारों में
जिस आंगन में कुछ घंटों बाद शहनाइयां गूंजनी थीं और मंगल गीत गाए जाने थे, वहां अब चीख-पुकार और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। दुल्हन के लिबास में सजी बेटी के सिर से पिता का साया शादी के ही दिन उठ जाना, इस त्रासदी को और भी भयावह बना देता है। इस घटना की सूचना मिलते ही देशनोक सहित आसपास के गांवों से लोग शोक व्यक्त करने उमड़ पड़े।

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