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पीबीएम अस्पताल से राहत की खबर: प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में मरीज राहिला को किया गया डिस्चार्ज; 2 वेंटीलेटर पर और 2 का ICU में इलाज जारी

India-1stNews



​— मेडिकल एक्सपर्ट्स का कमाल: राहिला के फेफड़ों में भरा था पानी और सांस लेने में थी भयंकर तकलीफ; पीबीएम के डॉक्टरों ने वेंटिलेटर और डायलिसिस की नौबत से बाहर निकाल कर दिया जीवनदान।

तारादेवी के बाद एक और प्रसूता डिस्चार्ज: पोस्ट कोविड आईसीयू में भर्ती मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार; अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने दी प्रसूताओं के घर लौटने की आधिकारिक जानकारी।

24 घंटे डॉक्टरों की सुपर-मॉनिटरिंग: प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार और डॉ. रेखा आचार्य के निर्देशन में नेफ्रो, न्यूरो और गायनी के शीर्ष विशेषज्ञों की संयुक्त टीम आईसीयू में तैनात।

बीकानेर, 18 जून (गुरुवार)। बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम राजकीय चिकित्सालय के पोस्ट कोविड आईसीयू (ICU) वॉर्ड से राहत और बड़े विधिक संतोष की खबर सामने आई है। अस्पताल के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों और स्त्री रोग विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने मिलकर अत्यंत गंभीर स्थिति में भर्ती प्रसूताओं की हालत में चमत्कारिक सुधार करने में सफलता हासिल की है।

​अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, क्रिटिकल वॉर्ड में जीवन और मौत के बीच जूझ रही एक और प्रसूता को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद बुधवार को डिस्चार्ज (अस्पताल से छुट्टी) कर घर भेज दिया गया है। इससे पूर्व एक अन्य प्रसूता तारादेवी भी पूरी तरह ठीक होकर अपने नवजात के साथ घर लौट चुकी हैं।

जब भर्ती हुई तो यूरिन आउटपुट था शून्य और हीमोग्लोबिन मात्र 6 ग्राम

​पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने इस बेहद जटिल और सफल इलाज की विधिक केस हिस्ट्री साझा करते हुए बताया:

  • अत्यंत गंभीर थी राहिला: प्रसूता राहिला को जब पीबीएम के आईसीयू वॉर्ड में शिफ्ट किया गया था, तब उसकी क्लिनिकल स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। शरीर में खून की भारी कमी के कारण उसका हीमोग्लोबिन स्तर घटकर मात्र 6 ग्राम प्रति डेसीलीटर (6\text{ g/dL}) रह गया था।
  • किडनी ने काम करना किया था बंद: सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि राहिला का यूरिन आउटपुट लगभग शून्य (0\text{ mL}) तक पहुंच चुका था, जिससे शरीर के अंगों में टॉक्सिन्स (जहर) फैलने का खतरा था। उसके फेफड़ों में पानी भर गया था (पल्मोनरी एडिमा) और वह बिना हाई-फ्लो ऑक्सीजन सपोर्ट के सांस भी नहीं ले पा रही थी।

चमत्कारिक रिकवरी: शून्य से 3500 एमएल पहुंचा यूरिन आउटपुट

​डॉ. घीया ने बताया कि स्थिति की भयंकर संवेदनशीलता को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों के एक विशेष पैनल की 24 घंटे की निगरानी में राहिला का गहन और एग्रेसिव क्रिटिकल केयर ट्रीटमेंट शुरू किया गया। डॉक्टरों की इस अथक मेहनत का परिणाम यह रहा कि राहिला की किडनी ने दोबारा पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर दिया।

​उसका यूरिन आउटपुट शून्य से बढ़कर अब लगभग 3500 मिलीलीटर (3500\text{ mL}) प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जो पूरी तरह सामान्य है। इसके साथ ही जीवन रक्षक दवाओं और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की मदद से उसका हीमोग्लोबिन भी सुरक्षित स्तर 8.2 ग्राम प्रति डेसीलीटर (8.2\text{ g/dL}) पर आ गया है। फेफड़ों की तकलीफ पूरी तरह नियंत्रित होने के बाद डॉक्टरों ने उसे पूर्णतः फिट पाकर अस्पताल से सहर्ष डिस्चार्ज कर दिया।

वेंटिलेटर सपोर्ट पर मौजूद 2 मरीजों के लिए 24 घंटे मुस्तैद है डॉक्टरों की विंग

​अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने न्यूज़ बुलेटिन में आगे बताया कि पोस्ट कोविड आईसीयू में उपचाराधीन दो अन्य प्रसूताओं की स्थिति में भी लगातार गुणात्मक सुधार दर्ज किया जा रहा है। यदि उनके क्लिनिकल पैरामीटर्स इसी तरह स्थिर रहे, तो आगामी दो-तीन दिनों के भीतर उन्हें भी वॉर्ड से छुट्टी देकर घर भेज दिया जाएगा। वहीं, इसी आईसीयू में वर्तमान में वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर चल रहे दो अन्य क्रिटिकल मरीजों की स्थिति पर सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम राउंड-द-क्लॉक (24 घंटे) नजर रखे हुए है और उन्हें बेस्ट मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में इन टॉप एक्सपर्ट्स ने संभाला मोर्चा

​सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार के साथ ही अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. रेखा आचार्य एवं डॉ. नीति शर्मा स्वयं इस पूरे रेस्क्यू और ट्रीटमेंट ऑपरेशन की पल-पल मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस महा-बचाव अभियान में पीबीएम की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम में ये डॉक्टर शामिल हैं:

  1. स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग: विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष खजोटिया एवं डॉ. सुमन बुडानिया।
  2. नेफ्रोलॉजी विभाग (किडनी विशेषज्ञ): डॉ. जितेंद्र फलोदिया।
  3. न्यूरोलॉजी विभाग (मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ): डॉ. खेताराम शर्मा।
  4. निश्चेतन (एनेस्थीसिया) एवं श्वसन रोग विभाग: डॉ. विशाल और डॉ. रवि चांडक।

​इसके साथ ही मेडिसिन आईसीयू स्टाफ, डायलिसिस यूनिट स्टाफ और क्रिटिकल केयर नर्सिंग टीम की संयुक्त विंग इन प्रसूताओं को नया जीवन देने में मुस्तैदी से जुटी हुई है।

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