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प्रसूताओं की मौत का बहुचर्चित मामला: ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली जैक्सन लैबोरेट्रीज के लाइसेंस रद्द, WHO ने भारत सरकार से मांगी रिपोर्ट

India-1stNews



​— बड़ा रेगुलेटरी एक्शन: सीडीएससीओ (CDSCO) और राज्य ड्रग रेगुलेटर्स की संयुक्त जांच के बाद कंपनी के पंजाब और हिमाचल प्रदेश प्लांट्स पर लगा ताला।

जांच में सैंपल फेल: कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत के बाद हुई जांच में 'TOCIN' (ऑक्सीटोसिन) इंजेक्शन में कॉम्पोनेंट की मात्रा पर्याप्त नहीं मिली; बीकानेर में भी आए थे किड़नी फेल होने के मामले।

केंद्रीय मंत्रालय सख्त: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट; फार्मा सेक्टर में क्वालिटी उल्लंघन पर 'ज़ीरो-टॉलरेंस'।

वैश्विक स्तर पर हलचल: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत सरकार से पूछा— क्या यह समस्या केवल एक ही क्षेत्र तक सीमित है या इसका असर अन्य वितरण क्षेत्रों पर भी है?

बीकानेर/कोटा, 27 जून (शनिवार)। राजस्थान के कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत तथा किडनी फेल होने के बहुचर्चित और बेहद गंभीर मामले में केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने बड़ा एक्शन लेते हुए विवादित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन निर्माता कंपनी मैसर्स जैक्सन लेबोरेट्रीज प्रा.लि. के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

​इसी बीच, इस पूरे घटनाक्रम की गूंज वैश्विक स्तर पर भी सुनाई दी है, जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस मामले को लेकर भारत सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

कोटा में प्रसूताओं की मौत के बाद खुली पोल

​इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कोटा में प्रसूताओं को प्रसव के दौरान इस कंपनी के 1 एमएल क्वांटिटी के इंजेक्शन लगाए गए, जिसके बाद वहां 5 प्रसूताओं की दर्दनाक मौत हो गई। बीकानेर में भी इस दवा के इस्तेमाल के बाद प्रसूताओं की सेहत बिगड़ने और किडनी फेल होने के गंभीर मामले सामने आए थे।

​घटना के तुरंत बाद हरकत में आए राजस्थान ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने वहां मौजूद दवाइयों, इंजेक्शन और सर्जिकल आइटम्स की गहन जांच करवाई। इस जांच की रिपोर्ट में कंपनी के TOCIN (ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 5ml) का सैंपल पूरी तरह फेल पाया गया। विधिक लैबोरेट्री जांच में सामने आया कि इंजेक्शन में जो मुख्य जीवनरक्षक ऑक्सीटोसिन कम्पोनेंट होना चाहिए था, वह पर्याप्त मात्रा में मौजूद ही नहीं था।

सेंट्रल टीमों की जांच के बाद प्लांट्स सीज

​सैंपल फेल होने और मौतों का आंकड़ा सामने आने के बाद सीडीएससीओ (CDSCO) ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के राज्य ड्रग रेगुलेटर्स के साथ मिलकर संयुक्त जांच टीमों का गठन किया। इन टीमों ने जैक्सन लैबोरेट्रीज के अमृतसर (पंजाब) और हिमाचल प्रदेश स्थित दोनों मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स पर औचक दबिश दी।

​जांच के दौरान 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज' (GMP) के नियमों का भारी उल्लंघन और गंभीर तकनीकी कमियां पाई गईं। संयुक्त जांच टीमों की सख्त सिफारिश के आधार पर संबंधित राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों ने कंपनी के दोनों यूनिट्स के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई दर्शाती है कि देश के फार्मास्युटिकल सेक्टर में दवाओं की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों के प्रति सरकार 'ज़ीरो-टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है।

WHO ने भारत से मांगी ग्लोबल निगरानी रिपोर्ट

​इस गंभीर प्रकरण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत सरकार से आधिकारिक तौर पर जानकारी मांगी है। मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि डब्ल्यूएचओ ने अपने ग्लोबल फार्माकोविजिलेंस और रेगुलेटरी निगरानी तंत्र की स्थापित प्रक्रियाओं के तहत यह कदम उठाया है।

​डब्ल्यूएचओ ने भारत सरकार के नियामक बोर्ड से मुख्य रूप से यह पूछा है कि:

  1. ​इस घटिया इंजेक्शन से प्रसूताओं की मौत का यह घातक मामला केवल राजस्थान के खास क्षेत्रों (कोटा-बीकानेर) तक ही सीमित है या देश के अन्य राज्यों में भी इसके लक्षण दिखे हैं?
  2. ​इस दवा के कॉम्पोनेंट फेल होने के पीछे के तकनीकी और वैज्ञानिक कारण क्या हैं?

​दरअसल, डब्ल्यूएचओ ऐसी जानकारी इसलिए जुटाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस दूषित या घटिया उत्पाद का वितरण जिन अन्य देशों या राज्यों में हुआ है, वहां समय रहते अलर्ट जारी कर अन्य जिंदगियों को सुरक्षित किया जा सके। फिलहाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से इस पूरे मामले की अंतिम तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है, जिसके आधार पर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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