– तांडव: 25 से अधिक खेजड़ी के पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी; मौके पर अब सिर्फ 2 पेड़ खड़े, शेष ठूंठ में तब्दील।
– विभाग की सफाई: रेंजर महेश जाखड़ बोले— "जमीन वन विभाग की नहीं, इसलिए हमारी सीधी भूमिका नहीं।"
– वादा खिलाफी: कैबिनेट मंत्री के.के. बिश्नोई के सख्त आदेशों के बाद भी बीकानेर में नहीं रुक रही पेड़ों की अवैध कटाई।
बीकानेर, 26 मार्च (गुरुवार)।बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण के दावों की हवा एक बार फिर निकल गई है। ग्राम पंचायत गाढ़वाला के एक निजी खेत में अज्ञात लोगों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए खेजड़ी के 25 से अधिक हरे-भरे पेड़ों को काट दिया। सुबह जब ग्रामीणों ने यह नजारा देखा, तो पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
मौके पर पहुँचे राजस्व और वन अधिकारी
घटना की सूचना मिलते ही पटवारी राकेश डूडी और गिरदावर रामदेव सारस्वत ने मौके का निरीक्षण किया। पटवारी डूडी ने बताया कि इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। मौके पर ग्राम विकास अधिकारी को भी बुलाया गया, हालांकि पेड़ों की मिल्कियत को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। वहीं, वन विभाग के रेंजर महेश जाखड़ और वन रक्षक मालम सिंह ने भी घटनास्थल का जायजा लिया, लेकिन विभाग ने जमीन वन विभाग की न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
आंदोलन के बाद भी नहीं बदला मंजर
गौरतलब है कि पिछले दिनों बीकानेर में खेजड़ी की कटाई के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय कैबिनेट मंत्री के.के. बिश्नोई ने मंच से आश्वासन दिया था कि राज्य वृक्ष को काटने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन गाढ़वाला की यह घटना बताती है कि लकड़ी माफियाओं में कानून का कोई खौफ नहीं है।
ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने जताया रोष
इस घटना से बिश्नोई समाज और वन्यजीव प्रेमियों में भारी नाराजगी है। मौके पर रामगोपाल बिश्नोई, हरिराम खीचड़ और रामकिशन बिश्नोई सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन से दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बार फिर बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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