- दिव्य समागम: संत शिरोमणि बजरंग दास जी महाराज के कर-कमलों से हुआ भूमि पूजन; वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रखी गई नींव।
- बड़ी घोषणा: मंदिर निर्माण के लिए समाज ने दिखाई दरियादिली; दानदाताओं ने 86.83 लाख रुपये की सहयोग राशि की समर्पित।
- जनसेवा: गंगाशहर के पंचारिया परिवार द्वारा निर्मित शीतल जल प्याऊ का हुआ लोकार्पण।
बीकानेर (कोलायत), 26 अप्रैल (रविवार)। न्याय शास्त्र के प्रणेता महर्षि गौतम, अहिल्या माता व राम दरबार मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण का शुभारंभ कोलायत की पावन धरा पर दिव्य भूमि पूजन के साथ हुआ। गौतम सेवा समिति, कोलायत के तत्वाधान में आयोजित इस समारोह में गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के हजारों लोग साक्षी बने।
संतों का आशीर्वाद और चांदी की ईंट
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर बजरंग दास जी महाराज ने अपने कर-कमलों से चांदी की ईंट रखकर मंदिर की नींव रखी। इस दौरान पूरा परिसर वैदिक मंत्रों और महर्षि गौतम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। महाराज श्री ने कबीर दास जी के दोहे “धर्म कियों धन ना घटे” के माध्यम से समाज को परोपकार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
समाज की एकजुटता: करोड़ों की ओर बढ़ते कदम
मंदिर पुनर्निर्माण के आह्वान पर गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज के भामाशाहों ने दिल खोलकर दान दिया। समिति के अनुसार, आज एक ही दिन में 86,83,900 रुपये (छियासी लाख तिरासी हजार नौ सौ) की आर्थिक सहयोग राशि प्राप्त हुई। समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों, महासभा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा देहात अध्यक्ष, सरपंचों और पार्षदों ने इस पुनीत कार्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
विप्र सेना और सामाजिक संगठनों का साथ
इस दिव्य आयोजन में विप्र सेना, गौतम नारायण सेना 108, शैक्षणिक व परमार्थिक ट्रस्ट, गौतम सेवा ट्रस्ट और गौतम सेवा समिति की बीकानेर कार्यकारिणी का विशेष सहयोग रहा। सभी संगठनों ने मिलकर मंदिर निर्माण को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने का संकल्प लिया।
शीतल जल प्याऊ का उद्घाटन
समाज सेवा की कड़ी में बाबा रामदेव टेंट हाउस, गंगाशहर (पंचारिया परिवार) की ओर से बनवाई गई शीतल जल प्याऊ का भी संत बजरंग दास जी द्वारा उद्घाटन किया गया। यह प्याऊ कोलायत आने वाले श्रद्धालुओं और आमजन के लिए भीषण गर्मी में बड़ी राहत बनेगी।
अध्यक्ष की अपील
गौतम सेवा समिति के अध्यक्ष जगदीश जी मास्टर ने सभी अतिथियों और दानदाताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने समाज से भावुक अपील करते हुए कहा कि जब तक मंदिर का शिखर पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा अनुसार इस 'ज्ञान मंदिर' के निर्माण में सहयोग जारी रखे।




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