– अनूठी पहल: धरने पर बैठे पर्यावरण प्रेमियों के लिए सुमित कोचर और टीम ने संभाला मोर्चा; कहा- खेजड़ी बचाना हम सबकी जिम्मेदारी
– भाईचारा: चाय की चुस्कियों के साथ दिया एकता का संदेश; ठंड और संघर्ष के बीच ऊर्जा का स्रोत बनी यह 'स्पेशल चाय'
बीकानेर, 3 फरवरी (मंगलवार)। बीकानेर में चल रहे 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' में सोमवार को संघर्ष के साथ-साथ सेवा और सरोकार का अनोखा रंग देखने को मिला। आंदोलन स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने "मोहब्बत की दुकान" सजाई और धरने पर बैठे पर्यावरण प्रेमियों को निःशुल्क चाय पिलाकर उनका स्वागत किया।
इस पहल का उद्देश्य केवल चाय पिलाना नहीं, बल्कि कड़ाके की ठंड में डटे आंदोलनकारियों को यह अहसास दिलाना था कि इस लड़ाई में पूरा शहर उनके साथ खड़ा है।
संघर्ष के बीच प्रेम का 'मीठा' संदेश
सुमित वल्लभ कोचर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आंदोलन स्थल पर स्टॉल लगाई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई सिर्फ गुस्से से नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे से भी लड़ी जा सकती है। 'मोहब्बत की दुकान' के जरिए आंदोलनकारियों को संदेश दिया गया कि खेजड़ी राजस्थान की लाइफलाइन है और इसकी रक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। ठंड के बीच गरमा-गरम चाय ने आंदोलनकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया।
"खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, हमारी संस्कृति है"
इस सेवा कार्य के दौरान पर्यावरण प्रेमियों ने पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास आंदोलन को मानवीय रूप देते हैं और समाज को जोड़ने का काम करते हैं। कार्यकर्ताओं ने संकल्प दोहराया कि खेजड़ी संरक्षण के लिए जन-जागरूकता और प्रेमपूर्ण प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
इन कार्यकर्ताओं ने संभाली कमान
इस सेवा कार्य में कांग्रेस के कई सक्रिय कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इनमें प्रमुख रूप से सुमित वल्लभ कोचर, जयदीप सिंह जावा, मनोज चौधरी, बलराम नायक, अब्दुल रहमान लोदरा, दुर्गादत गहलोत, सलिम भाटी, जुगल गहलोत, राजेश पुनिया, रुस्तम गुर्जर सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

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