– मंदिर में दरिंदगी: छत्तरगढ़ इलाके के हरिराम मंदिर में 7 साल की मासूम को बनाया था शिकार; 2022 की घटना में अब आया इंसाफ।
– रंगे हाथों धराया: बच्ची की चीख सुनकर माँ ने खिड़की से झांका, तो सामने थी पुजारी अणतुराम की हैवानियत।
– सख्त सजा: न्यायाधीश अनु अग्रवाल ने विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा; 20 साल का कठोर कारावास और भारी अर्थदंड।
बीकानेर, 26 मार्च (गुरुवार)।बीकानेर की पोक्सो कोर्ट नंबर-1 की न्यायाधीश अनु अग्रवाल ने साढ़े तीन साल पुराने एक घिनौने अपराध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने छत्तरगढ़ थाना इलाके के एक मंदिर के पुजारी अणतुराम जाट को 7 वर्षीय मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म के प्रयास और अपहरण का दोषी मानते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
पीड़ित बालिका के पिता ने छत्तरगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 7 साल की बेटी स्कूल से शाम तक घर नहीं लौटी। जब माँ उसे ढूंढती हुई सूरतगढ़ रोड स्थित हरिराम मंदिर के पास पहुँची, तो उसे बच्ची के चीखने की आवाज सुनाई दी। माँ ने जब खिड़की से झांका, तो मंदिर का पुजारी अणतुराम उर्फ अणदाराम बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास कर रहा था। शोर मचाने पर आरोपी वहां से भाग निकला, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया।
इन धाराओं में मिली सजा:
अदालत ने आरोपी के कृत्य को जघन्य मानते हुए उसे निम्नलिखित धाराओं में दंडित किया:
- पोक्सो एक्ट (धारा 5M/6): 20 वर्ष का कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माना।
- IPC धारा 366 (अपहरण): 10 वर्ष का कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माना।
- IPC धारा 363 एवं JJ एक्ट: 5 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना।
- IPC धारा 342 (बंधक बनाना): 1 वर्ष का कारावास।
कुल मिलाकर दोषी को अधिकतम 20 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होंगे और कुल 3 लाख 51 हजार रुपये का अर्थदंड भरना होगा।
न्याय की जीत
इस फैसले के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त सजा से अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होगा। मंदिर जैसे स्थान पर हुए इस कृत्य ने पूरे बीकानेर को झकझोर दिया था, जिसे आज माननीय अदालत ने इंसाफ की चौखट पर अंजाम तक पहुँचाया है।

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