– गौरवशाली उपलब्धि: बीकानेर जिले की तीसरी और पुष्करणा समाज की पहली महिला रेल चालक बनीं शिवानी; परिवार और समाज में जश्न का माहौल।
– विरासत का मान: 1992 में लोको पायलट पद से रिटायर हुए थे दादाजी स्व. बद्री नारायण पुरोहित; पोती ने उन्हीं की वर्दी को अपना सपना बनाया।
– ट्रेनिंग में अव्वल: उदयपुर ZRTC में 237 प्रशिक्षुओं के बीच हासिल की 34वीं रैंक; जोधपुर और बीकानेर डिवीजन की क्लास मॉनिटर भी रहीं।
बीकानेर, 03 अप्रैल (शुक्रवार)।बीकानेर के पुष्करणा समाज की बेटियों ने शिक्षा और कला के क्षेत्र में तो हमेशा परचम लहराया है, लेकिन अब वे तकनीकी और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। शिवानी पुरोहित ने भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट बनकर न केवल रूढ़ियों को तोड़ा है, बल्कि समाज का नाम पूरे देश में रोशन किया है।
दादा का सपना, पोती की उड़ान
शिवानी के पिता योगेन्द्र कुमार पुरोहित (एडवोकेट) और माता सपना पुरोहित ने हमेशा अपनी बेटी के सपनों को पंख दिए। शिवानी के प्रेरणास्रोत उनके दादा स्व. बद्री नारायण पुरोहित रहे, जो स्वयं लोको पायलट थे। शिवानी ने बचपन से ही अपने दादाजी की तरह ट्रेन चलाने का सपना देखा था, जो आज कड़ी मेहनत के बाद हकीकत में बदल गया है।
मेधावी छात्रा और नेतृत्व क्षमता
शिवानी की सफलता का सफर उनकी कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरा है:
- 15 दिसंबर 2025: भारतीय रेलवे में हुई आधिकारिक नियुक्ति।
- भगत की कोठी (जोधपुर): ट्रेनिंग के दौरान बीकानेर और जोधपुर डिवीजन की क्लास मॉनिटर रहीं।
- ZRTC उदयपुर: 1 फरवरी से 2 अप्रैल तक चली गहन ट्रेनिंग में 237 प्रशिक्षुओं में 34वीं रैंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित की।
बीकानेर डिवीजन में संभालेंगी कमान
शिवानी को बीकानेर डिवीजन अलॉट हुआ है, जिसका अर्थ है कि जल्द ही वे बीकानेर की पटरियों पर ट्रेन दौड़ाती नजर आएंगी। बीकानेर जिले के इतिहास में वे तीसरी महिला हैं जो इस पद तक पहुँची हैं, लेकिन पुष्करणा समाज के लिए यह पहला मौका है।
युवाओं के लिए संदेश
अपनी सफलता पर शिवानी कहती हैं:
"यदि देश का युवा कुछ ठान ले, तो कोई भी काम असंभव नहीं है। मैंने दादाजी की तरह लोको पायलट बनने का जो सपना देखा था, वह मम्मी-पापा के सहयोग से आज साकार हुआ है। यह सफलता उन सभी बेटियों के लिए है जो लीक से हटकर कुछ करना चाहती हैं।"


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