– शिक्षा विभाग का एक्शन: माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट (IAS) ने जारी किए सख्त आदेश; 3 सदस्यीय कमेटियां लेंगी निजी स्कूलों की 'क्लास'।
– जांच का घेरा: क्या स्कूल किसी खास दुकान से सामान खरीदने का बना रहे दबाव? 20 अप्रैल तक निदेशालय को सौंपनी होगी जिलेवार रिपोर्ट।
– अभिभावकों को पावर: नियमों की अनदेखी पर सीधे ईमेल (ad.psp.dsc@rajasthan.gov.in) पर कर सकेंगे शिकायत; सरकार ने खोली हेल्पलाइन।
बीकानेर, 03 अप्रैल (शुक्रवार)। नए शिक्षण सत्र के शुरू होते ही निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को खास ब्रांड की किताबें, जूते और यूनिफॉर्म के लिए मजबूर करने की शिकायतों पर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशक सीताराम जाट (IAS) ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की आड़ में व्यापार करने वाले स्कूलों पर अब कानूनी चाबुक चलेगा।
3 सदस्यीय कमेटियां करेंगी 'सर्जिकल स्ट्राइक'
निदेशालय के आदेशानुसार, प्रत्येक जिले में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें 15 अप्रैल 2026 तक अपने-अपने क्षेत्रों के गैर-सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी। टीम यह जांचेगी कि स्कूल संचालक अभिभावकों को किसी विशेष दुकान का पता तो नहीं थमा रहे या फीस एक्ट के विपरीत वसूली तो नहीं कर रहे।
क्यों सख्त हुआ विभाग?
1 अप्रैल से नया सत्र शुरू हो चुका है और बीकानेर सहित प्रदेश भर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि स्कूल संचालक कमीशन के चक्कर में अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से ही महंगे दामों पर सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्कूल की शिकायत सही पाई गई, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
निरीक्षण के 3 मुख्य 'चेक पॉइंट्स'
- दुकान की बाध्यता: क्या अभिभावकों को बाजार से सामग्री खरीदने की आजादी है?
- फीस विनियमन: क्या स्कूल तय नियमों से अधिक फीस वसूल रहा है?
- रिपोर्टिंग डेडलाइन: सभी कमेटियों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 20 अप्रैल 2026 तक निदेशालय को हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में जमा करानी होगी।
अभिभावकों के लिए उम्मीद की किरण
मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सत्र की शुरुआत में ही हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना मुश्किल होता है। सरकार के इस दखल से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी। विभाग ने अपील की है कि यदि कोई स्कूल संचालक दबाव बनाए, तो डरे नहीं और विभाग को आधिकारिक ईमेल पर तुरंत सूचित करें।
"निजी स्कूलों को पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों की पालना हर हाल में करनी होगी। यदि निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
— सीताराम जाट, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा राजस्थान

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