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बीकानेर: अदालतों को बम से उड़ाने की धमकियों के बीच बार काउंसिल चुनाव; प्रत्याशी कुलदीप शर्मा ने चुनाव से 2 दिन पहले पोलिंग बूथों को पुलिस कस्टडी में लेने की उठाई मांग

India-1stNews



– सुरक्षा पर संकट: राजस्थान हाई कोर्ट सहित जिला न्यायालयों को मिल रही धमकियों से हड़कंप; मतदान के दिन बड़ी साजिश की आशंका।

– चुनाव आयोग को पत्र: जोधपुर हाई पावर इलेक्शन कमेटी को लिखा पत्र; राजस्थान के सभी 280 बूथों पर 'पुलिस सुरक्षा घेरा' बनाने की अपील।

– शांतिपूर्ण मतदान: चुनाव से 48 घंटे पहले पुलिस के कब्जे में हों मतदान केंद्र, ताकि निर्विघ्न संपन्न हो सके लोकतांत्रिक प्रक्रिया।

बीकानेर, 13 अप्रैल (सोमवार)। राजस्थान में 22 अप्रैल 2026 को होने जा रहे बार काउंसिल चुनाव की सुरक्षा को लेकर वकीलों में भारी चिंता व्याप्त है। पिछले कुछ समय से राजस्थान के विभिन्न न्यायालयों को बम से उड़ाने के धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था में भय का माहौल है। इसी के मद्देनजर बीकानेर से बैलेट नंबर 09 के प्रत्याशी और वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप कुमार शर्मा ने चुनाव कमेटी को पत्र लिखकर सुरक्षा पुख्ता करने की मांग की है।

280 बूथों पर कड़े पहरे की जरूरत

​कुलदीप कुमार शर्मा ने चेयरमैन, हाई पावर इलेक्शन कमेटी (जोधपुर) को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि प्रदेशभर में लगभग 280 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। धमकियों के वर्तमान दौर को देखते हुए इन सभी स्थानों पर पुलिस की समुचित व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने मांग की है कि मतदान की तारीख से दो दिन पूर्व ही सभी बूथों को पुलिस कस्टडी में ले लिया जाए ताकि किसी भी प्रकार की अवांछनीय घटना को रोका जा सके।

शांतिपूर्ण चुनाव ही एकमात्र लक्ष्य

​कुलदीप शर्मा के अनुसार, न्यायालयों को मिल रही धमकियां न केवल डराने वाली हैं, बल्कि इनसे न्यायिक व्यवस्था भी चरमरा जाती है। ऐसे में प्रदेशभर के हजारों अधिवक्ताओं की सुरक्षा दांव पर है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि चुनाव निर्विघ्न और विधिवत रूप से संपन्न हो सकें, इसके लिए इलेक्शन कमेटी को गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर तत्काल कदम उठाने चाहिए।

प्रत्याशी की अपील: सतर्कता ही बचाव

​स्वयं चुनाव मैदान में होने के नाते कुलदीप शर्मा ने प्रदेश के अन्य प्रत्याशियों और मतदाताओं की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया है। बीकानेर बार एसोसिएशन सहित प्रदेश के अन्य बार संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया है, ताकि मतदान के दिन अधिवक्ता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

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