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बीकानेर: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामला; मृतका के परिजनों को 5 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश

India-1stNews



​— ऐतिहासिक फैसला: जिला न्यायालय ने वर्ष 2017 में सोनगिरी कुएं के पास हुए भीषण पटाखा विस्फोट मामले में मृतका जहूरन के परिजनों के पक्ष में अहम आदेश जारी किया है।

​— लापरवाही पर टिप्पणी: कोर्ट ने माना कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में विस्फोटक पदार्थों के भंडारण में भारी लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह जानलेवा हादसा हुआ।

​— ब्याज सहित भुगतान: जिला न्यायाधीश अश्वनी विज ने प्रतिवादियों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए जनवरी 2018 से अदायगी तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए हैं।

बीकानेर, 16 मई (शनिवार)। बीकानेर के डीडू सिपाहियान मोहल्ले में करीब नौ वर्ष पूर्व हुए बहुचर्चित और भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में जिला न्यायालय ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सुनाया है। अदालत ने हादसे में जान गंवाने वाली महिला जहूरन के आश्रितों को पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि (मुआवजा) अदा करने का आदेश दिया है।

घनी आबादी में अवैध भंडारण बना था काल

मामले के अनुसार, 7 जुलाई 2017 को सोनगिरी कुएं के पास स्थित एक रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण के दौरान जोरदार धमाका हुआ था। इस विस्फोट के कारण लगी भीषण आग से आसपास के कई मकान जमींदोज हो गए थे और कई लोगों की मौत हुई थी। हादसे में जहूरन नामक महिला गंभीर रूप से झुलस गई थी, जिसने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। मृतका के परिजनों ने अदालत में 25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का दावा पेश करते हुए आरोप लगाया था कि आबादी क्षेत्र में अवैध रूप से बारूद का भंडारण किया जा रहा था।

केवल लाइसेंस होना जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं: कोर्ट

मामले की सुनवाई करते हुए जिला न्यायाधीश अश्वनी विज ने प्रतिवादी कैलाशचंद और महेंद्र की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विस्फोटक सामग्री अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में आती है और इसके भंडारण के लिए उच्च स्तरीय सुरक्षा मानक अनिवार्य हैं। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल निर्माण या भंडारण का लाइसेंस होने भर से प्रतिवादियों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। वे यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे कि यह हादसा किसी प्राकृतिक कारण से हुआ था।

दो माह में राशि बांटने के निर्देश

अदालत ने वादी पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए आदेश दिया कि दो महीने के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए। आदेश के तहत कुल 5 लाख रुपये की राशि में से पांचों वादियों को एक-एक लाख रुपये दिए जाएंगे। इस मामले में वादीगण की ओर से पैरवी अधिवक्ता जावेद खान कल्लर ने की।

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