— न्यायिक फैसला: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर पारीक ने आरोपी बाबू खां को दोषी करार देते हुए सुनाई सख्त सजा।
— घटना: अगस्त 2017 में गंगाशहर थाना क्षेत्र के गांधी प्याऊ के पास आरोपी को आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ा गया था।
— सबूतों के आधार पर सजा: कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल (FSL) साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों को आधार मानकर अपराध को संदेह से परे साबित माना।
बीकानेर, 13 मई (बुधवार)। बीकानेर की एक अदालत ने गाय के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने के एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर पारीक की अदालत ने आरोपी बाबू खां को दोषी ठहराते हुए उसे 5 वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यदि आरोपी जुर्माना भरने में विफल रहता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 18 अगस्त 2017 की रात की है। बीकानेर के गंगाशहर थाना क्षेत्र स्थित गांधी प्याऊ के पास स्थानीय लोगों ने आरोपी बाबू खां को एक गाय के साथ अप्राकृतिक कृत्य करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। मौके पर मौजूद गवाहों ने तुरंत आरोपी को काबू कर पुलिस के हवाले किया, जिसके बाद गंगाशहर थाने में मामला दर्ज किया गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य न केवल घृणित है, बल्कि इससे समाज में गंभीर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न होने की भी आशंका थी। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और मानसिक स्थिति का हवाला देते हुए नरमी की अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मजबूत किया पक्ष
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों के साथ-साथ मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और जब्त किए गए अधोवस्त्र जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि गवाहों के बयानों में मामूली विरोधाभासों के आधार पर उनकी विश्वसनीयता को कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि वैज्ञानिक साक्ष्य पूरी तरह से आरोपी के अपराध को पुष्ट करते हैं।

0 Comments