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बीकानेर: लापता व्यक्ति को 'मृत' बताकर करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल; फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से बेची पुश्तैनी भूमि

India-1stNews



​— सनसनीखेज धोखाधड़ी: वर्षों से लापता काका को कागजों में मृत घोषित कर हड़पी करोड़ों की कृषि भूमि; श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने शुरू की जांच।

— फर्जीवाड़ा: पत्नी पर लगा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर वारिस बनने और जमीन बेचने का आरोप; राजस्व रिकॉर्ड से खुला राज।

— न्यायिक हस्तक्षेप: पुलिस द्वारा सुनवाई न होने पर परिवादी ने ली कोर्ट की शरण; एसीजेएम कोर्ट के आदेश पर एएसआई देवाराम को सौंपी गई जांच।

​बीकानेर, 11 मई (सोमवार)। बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में जमीन हड़पने के लिए एक जीवित (लापता) व्यक्ति को मृत बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और करोड़ों रुपये की कृषि भूमि बेचने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस पूरे षड्यंत्र का खुलासा तब हुआ जब परिवादी अपनी जमीन पर लोन (KCC) लेने के लिए राजस्व रिकॉर्ड निकलवाने पहुँचा।

​लापता काका को कागजों में किया 'मृत'

​परिवादी कितासर बिदावतान निवासी नरपतसिंह पुत्र गुमानसिंह राजपूत ने न्यायालय में पेश परिवाद में बताया कि उसके काका मालसिंह वर्षों पहले घर छोड़कर चले गए थे, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला है। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर मालसिंह की पत्नी उम्मेद कंवर ने षड्यंत्र रचा और ग्राम पंचायत कितासर से मालसिंह की फर्जी मृत्यु दिनांक 4 फरवरी 1976 दर्शाते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।

​राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर बेची जमीन

​रोही कितासर बिदावतान स्थित खसरा नंबर 226 और 87 की बेशकीमती कृषि भूमि परिवादी के पिता और उसके काका के नाम दर्ज थी। आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर उम्मेद कंवर ने खुद को वारिस बताकर भूमि का इंतकाल अपने नाम करवा लिया और बाद में जमीन का आधा हिस्सा पुन्दलसर निवासी दशरथसिंह को बेच दिया। परिवादी को जब इसका पता चला और उसने विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे अंजाम भुगतने की धमकी दी।

​कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज

​परिवादी ने पहले पुलिस थाने और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उसने एसीजेएम कोर्ट की शरण ली। न्यायालय के कड़े आदेश के बाद श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने धोखाधड़ी और षड्यंत्र की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एएसआई देवाराम को सौंपी गई है, जो अब ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और जमीन की रजिस्ट्री के दस्तावेजों की पड़ताल करेंगे।

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