— बड़ी जांच: बीकानेर में एसओजी (SOG) की टीम ने डाला डेरा; सीआई नेमीचंद के नेतृत्व में तीन दिनों से चल रही गहन पड़ताल।
— फर्जीवाड़ा: बोथरा डायग्नोस्टिक लैब के दस्तावेजों में पीबीएम अस्पताल के चिकित्सकों के फर्जी साइन और मुहर मिलने की आशंका।
— बड़ा घोटाला: आरजीएचएस (RGHS) योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग और सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने का संदेह।
बीकानेर, 13 मई (बुधवार)। बीकानेर में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का मामला गरमाता जा रहा है। पिछले तीन दिनों से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम बीकानेर में डेरा डाले हुए है। आज एसओजी की टीम जांच के सिलसिले में पीबीएम अस्पताल पहुंची, जहाँ रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ संबंधित चिकित्सकों से पूछताछ की गई।
बोथरा डायग्नोस्टिक लैब पर गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में बीकानेर स्थित बोथरा डायग्नोस्टिक लैब जांच के घेरे में है. सूत्रों के अनुसार, एसओजी सीआई नेमीचंद की टीम ने लैब से जुड़े रिकॉर्ड, बिलों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की है। आशंका जताई जा रही है कि लैब द्वारा प्रस्तुत कई दस्तावेजों में पीबीएम के कार्डियोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. सुनील बुड़ानिया के कथित फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का उपयोग किया गया है।
चिकित्सकों ने फर्जीवाड़े से किया इनकार
जांच के दौरान कुछ चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि बिलों पर उनके हस्ताक्षर और मुहर फर्जी हो सकते हैं। एसओजी अधिकारियों ने पीबीएम अस्पताल अधीक्षक और संबंधित डॉक्टर से पूछताछ कर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिससे मामला और गहरा गया है。
करोड़ों के संगठित घोटाले की आशंका
जांच एजेंसियों को संदेह है कि आरजीएचएस योजना के तहत फर्जी जांच और कागजी बिलिंग के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान उठाने का खेल लंबे समय से चल रहा है। यदि ये तथ्य प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है, जिसमें कई रसूखदार लोग शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, एसओजी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां और खुलासे होने की पूरी संभावना है।

0 Comments