— विश्व रिकॉर्ड: महान्या सिंह राजपुरोहित ने झटके दो वर्ल्ड रिकॉर्ड; मात्र 5 साल की उम्र में बनीं 'वंडर किड'।
— अदभुत प्रतिभा: 6 मिनट में 50 कार्टव्हील के साथ बताए देशों के नाम, राजधानियां और यूनेस्को साइट्स।
— लेखिका भी: नन्ही जिम्नास्ट की किताब "महान्या- द वारियर ऑन द मैट" अमेजन पर बनी 'बेस्ट सेलर'।
बीकानेर, 10 मई (रविवार)। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, इस कहावत को बीकानेर की 5 वर्षीय नन्ही परी महान्या सिंह राजपुरोहित ने सच कर दिखाया है। महान्या ने अपनी शारीरिक चपलता और विलक्षण याददाश्त का ऐसा हैरतअंगेज प्रदर्शन किया है कि पूरी दुनिया दंग रह गई है। इस 'वंडर किड' ने 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराकर बीकानेर के साथ-साथ पूरे देश का मान बढ़ाया है।
असंभव को किया संभव: शारीरिक और मानसिक शक्ति का संगम
भाजपा नेता गुमान सिंह राजपुरोहित की पौत्री महान्या ने रिकॉर्ड बनाने के दौरान अपनी अद्वितीय एकाग्रता का परिचय दिया। उन्होंने मात्र 6 मिनट 18 सेकंड में लगातार 50 'कार्टव्हील' (जिम्नास्टिक कलाबाजी) किए। हैरानी की बात यह रही कि चक्रवात की गति से घूमते हुए भी वे स्क्रीन पर बदल रहे देशों के झंडे पहचान रही थीं और पूरी सटीकता के साथ देश का नाम, उसकी राजधानी और वहां स्थित 'यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट' का नाम बता रही थीं।
मल्टी-टैलेंटेड 'वंडर गर्ल': जिम्नास्ट, आर्चर और अब लेखिका
महान्या की प्रतिभा केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं है। वे एक प्रशिक्षित तीरंदाज (Archer) भी हैं। इतनी छोटी उम्र में उन्होंने अपनी लेखनी का लोहा भी मनवाया है।
- पहली किताब: "महान्या- द वारियर ऑन द मैट" (Mahanya- The Warrior on the Mat) हाल ही में प्रकाशित हुई है।
- प्रेरणा: यह पुस्तक बच्चों को साहस, कल्पना और दृढ़ संकल्प के लिए प्रोत्साहित करती है।
- उपलब्धि: यह किताब वर्तमान में अमेजन पर 'बेस्ट सेलर' श्रेणी में ट्रेंड कर रही है।
सफलता का मंत्र: माता-पिता का अटूट सहयोग
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर नन्ही महान्या ने बड़ी परिपक्वता के साथ अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि घर में अभ्यास के लिए विशेष सेटअप तैयार किया गया और पेशेवर कोचिंग दिलाई गई। महान्या का अगला लक्ष्य अब 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भारत का तिरंगा लहराना है।
परिवार और समाज में जश्न का माहौल
महान्या की इस उपलब्धि से माता प्रतिभा सिंह और पिता पुष्पेंद्र सिंह राजपुरोहित सहित पूरे राजपुरोहित समाज और बीकानेर के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक इस नन्ही खिलाड़ी को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।


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