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गंगाशहर सैटेलाइट अस्पताल में वेतन संकट: 5 महीने से खाली हाथ कर्मचारी; 'पन्नाधाय' कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

India-1stNews



​– बड़ा विरोध: मानदेय न मिलने से आक्रोशित कंप्यूटर ऑपरेटरों और अटेंडेंट ने किया कार्य बहिष्कार; अस्पताल के आगे धरने पर बैठे कार्मिक।

– शोषण का आरोप: जनवरी से अप्रैल 2026 तक का वेतन बकाया; अगस्त 2025 से नहीं जमा हुआ पीएफ (PF)।

– बदहाली: 6-7 हजार की नौकरी में घर चलाना हुआ मुश्किल; संभाग के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र में व्यवस्थाएं राम भरोसे।

​बीकानेर (गंगाशहर), 2 मई (शनिवार)। बीकानेर की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले पीबीएम अस्पताल और गंगाशहर सैटेलाइट अस्पताल में इन दिनों व्यवस्थाएं पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। यहाँ ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों को अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने आज कार्य बहिष्कार कर अस्पताल के गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

​5 महीने से सैलरी और 9 महीने से पीएफ बकाया

गंगाशहर सैटेलाइट अस्पताल में मैसर्स पन्नाधाय सिक्योरिटी सर्विस के अधीन कार्यरत 31 कार्मिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक का वेतन नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं, अगस्त 2025 से उनका पीएफ (PF) भी बकाया है। बार-बार अवगत करवाने के बावजूद कंपनी प्रबंधन और प्रशासन मौन साधे हुए है।

​'कैसे जलेगा घर का चूल्हा?'

6 से 7 हजार रुपए की मामूली तनख्वाह पर काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर, अटेंडेंट और ड्राइवरों का कहना है कि वेतन न मिलने से उनके परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है। आर्थिक तंगी के कारण कार्मिकों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि एक तरफ कंपनी भुगतान नहीं कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इसी कंपनी को एक और ठेका दे दिया है।

​पीबीएम का भी कोई धनी-धोरी नहीं

आरोप है कि संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल पीबीएम अब राजनेताओं की भेंट चढ़ चुका है। जब से नई कंपनी ने कमान संभाली है, तब से कर्मचारियों का आर्थिक शोषण बढ़ा है। धरना दे रहे कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनके मानदेय का भुगतान नहीं होता और पीएफ की समस्या नहीं सुलझती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।

​प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग

कार्मिकों ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि उनकी मनोस्थिति को समझते हुए इस आर्थिक शोषण से निजात दिलवाई जाए। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन और सरकार इन गरीब कर्मचारियों के हक की आवाज सुनती है या व्यवस्थाएं ऐसे ही ठप रहेंगी।



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