— सिस्टम पर सवाल: 'दिशा' की बैठक में मुद्दा उठने और बार-बार अवगत कराने के बावजूद प्रशासन रहा मौन; युवाओं ने पेश की मिसाल।
— बड़ी पहल: भीषण गर्मी में सूखे पड़े ऐतिहासिक तालाब से जेसीबी द्वारा हटाया कचरा और मिट्टी; मूक पशु-पक्षियों के लिए जुटाया जल।
— मिशन जल संचयन: मानसून से पहले सफाई का लक्ष्य ताकि बारिश की एक-एक बूंद को सहेजा जा सके; 'भैरूनाथ के दीवाने' टीम ने संभाला जिम्मा।
बीकानेर, 11 मई (सोमवार)। प्रशासनिक उदासीनता और अनदेखी के बीच बीकानेर की युवा शक्ति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर जज्बा हो तो किसी के भरोसे बैठने की जरूरत नहीं होती। बीकानेर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र श्री कोडमदेसर भैरू नाथ मंदिर का ऐतिहासिक तालाब पिछले लंबे समय से सूखा पड़ा हुआ था। प्रशासन को कई बार अवगत कराने और 'दिशा' की बैठक में भी यह मुद्दा उठाए जाने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो युवाओं ने स्वयं इस धरोहर को बचाने का बीड़ा उठाया।
धार्मिक आस्था और जीव-जंतुओं का आधार
यह तालाब केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि हजारों जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों और मछलियों के जीवन का भी प्रमुख आधार रहा है। जहाँ कभी पानी की लहरें दिखाई देती थीं, वहाँ आज सूखा और सन्नाटा पसरा हुआ था। भीषण गर्मी में मूक प्राणियों की बेबसी को देखते हुए युवाओं ने जनसहयोग से सफाई अभियान शुरू किया, जो अब पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन रहा है।
स्वयं के खर्च और संसाधनों से सफाई
जय श्री भैरूनाथ ग्रुप, रॉयल दीपसा और “भेरुनाथ के दीवाने” इंस्टाग्राम पेज की टीम ने जनसहयोग और स्वयं के खर्च से तालाब की सफाई शुरू की। करीब 15 से 20 युवाओं ने जेसीबी मशीन की सहायता से तालाब में जमा कचरा, मिट्टी और पुरानी मूर्तियों को हटाने का कार्य किया। साथ ही, तालाब में टैंकरों के माध्यम से पानी डलवाकर पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को तत्काल राहत पहुँचाने का प्रयास किया गया। युवाओं का कहना है कि मानसून आने से पहले सफाई होने से बारिश का पानी अधिक मात्रा में एकत्र हो सकेगा।
इन युवाओं ने दिखाई एकजुटता
इस अभियान में दीपक सांखला, गणेश तेजी, सोनिया गहलोत, भारत गहलोत, देवेंद्र गहलोत, शिव गहलोत, योगेश पंडित, नरेंद्र सिंह, प्रशांत कच्छावा, निखिल कच्छावा, अभिषेक तेजी, संदीप गेरू, नमन गुजराती सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने आमजन से भी इस पुण्य कार्य में आगे आकर सहयोग करने की अपील की है, ताकि बीकानेर की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके।



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