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राजस्थानी भाषा के लिए ऐतिहासिक दिन: सुप्रीम कोर्ट का राजस्थान सरकार को आदेश—सभी स्कूलों में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करें 'मायड़' भाषा

India-1stNews



​— क्रांतिकारी फैसला: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थानी भाषा को उसका हक दिलाने के लिए राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए।

NEP 2020 का हवाला: कोर्ट ने कहा—मातृभाषा में शिक्षा बच्चों का अधिकार है, 8वीं अनुसूची का इंतजार करना तर्कहीन।

रोजगार के अवसर: REET परीक्षा और शिक्षक भर्ती के सिलेबस में शामिल होगी राजस्थानी; स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे नौकरियों के द्वार।

नई दिल्ली/जयपुर, 12 मई (मंगलवार)। राजस्थान की साढ़े सात करोड़ जनता के दशकों पुराने संघर्ष और भावनाओं को आज देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने नई दिशा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए स्पष्ट आदेश दिए हैं कि वह राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शामिल करने के लिए व्यापक नीति तैयार करे।

"हम मूक दर्शक नहीं बन सकते" जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट के पुराने फैसले को पलटते हुए सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा, "जब राजस्थानी भाषा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है, तो स्कूली स्तर पर इसे लागू करने में देरी क्यों? हम संवैधानिक अधिकारों के हनन पर मूक दर्शक नहीं रह सकते।" बेंच ने जोर दिया कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देना राज्य का संवैधानिक कर्तव्य है।

प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के लिए कड़े दिशा-निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को समयबद्ध और चरणबद्ध तरीके से नीति लागू करने को कहा है:

  • प्रारंभिक चरण: फाउंडेशनल और प्रिपरेटरी स्तर पर राजस्थानी को अनिवार्य विषय या माध्यम के रूप में जोड़ा जाए।
  • बाध्यकारी आदेश: यह नियम केवल सरकारी स्कूलों के लिए नहीं, बल्कि राज्य के सभी निजी (Private) स्कूलों पर भी समान रूप से लागू होगा।
  • उच्च शिक्षा: धीरे-धीरे इसे उच्च कक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा।

REET और रोजगार पर पड़ेगा बड़ा असर इस फैसले का सबसे बड़ा असर शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं ने REET (Rajasthan Eligibility Examination for Teacher) के सिलेबस में राजस्थानी को शामिल करने की मांग की थी। अब राजस्थान में शिक्षक बनने के लिए राजस्थानी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य हो सकता है, जिससे बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के बजाय स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

8वीं अनुसूची का बहाना अब नहीं चलेगा लंबे समय से सरकार यह तर्क देती रही थी कि राजस्थानी भाषा संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है, इसलिए इसे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि शैक्षणिक मान्यता के लिए अनुसूची का इंतजार करना तर्कसंगत नहीं है। 2011 की जनगणना के अनुसार, राजस्थान में 4.36 करोड़ से अधिक लोग राजस्थानी बोलते हैं, जिनकी भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है।

सितंबर 2026 में देनी होगी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सितंबर 2026 में तय की है। तब तक राजस्थान सरकार को अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करनी होगी और यह बताना होगा कि स्कूलों में राजस्थानी पढ़ाने की तैयारी कहाँ तक पहुँची है और इसके लिए क्या नीति बनाई गई है।

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